चंद्रचूड़ सिंह के परिवार में करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति का विवाद, भाई ने 7 लोगों पर कराया केस; फर्जी वसीयत से जमीन हड़पने का आरोप

अलीगढ़: फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के परिवार से जुड़ा वर्षों पुराना पुश्तैनी संपत्ति विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। अलीगढ़ में करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति और पुरानी हवेली को लेकर उनके भाई एवं फिल्म निर्देशक अभिमन्यु सिंह ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। शिकायत में कथित फर्जी वसीयत तैयार करने, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं।
सात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
अभिमन्यु सिंह की शिकायत के आधार पर 14 अगस्त को रोरावर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में गायत्री देवी, जय सिंह, अंजनी सिंह, राबिन एकसन, संदीप कुमार सिंह, शिव कुमार और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर को नामजद किया गया है।
शिकायत के मुताबिक, परिवार की पुश्तैनी संपत्ति को कथित तौर पर एक फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर अपने नाम कराने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कराया गया और इसके बाद पैतृक जमीनों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विवादित संपत्तियों में पुरानी हवेली के अलावा कई पैतृक जमीनें शामिल बताई गई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
1994 की पंजीकृत वसीयत का दिया गया हवाला
अभिमन्यु सिंह ने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में परिवार की संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, उनकी दादी सीता देवी ने 18 अक्टूबर 1994 को एक पंजीकृत वसीयत तैयार की थी। इसमें उन्होंने अपनी संपत्ति अपने पति हरेंद्र पाल सिंह के नाम की थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, सीता देवी का निधन 1995 में हुआ था। इसके बाद हरेंद्र पाल सिंह परिवार की संपत्ति के उत्तराधिकारी बने। उनका निधन 31 जनवरी 1997 को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में हुआ था। इसी अवधि से जुड़ी एक दूसरी वसीयत को लेकर अभिमन्यु सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
मौत से एक दिन पहले वसीयत तैयार करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हरेंद्र पाल सिंह की मृत्यु से ठीक एक दिन पहले, 30 जनवरी 1997 को एक कथित फर्जी और अपंजीकृत वसीयत तैयार की गई। इसमें पैतृक संपत्ति का बड़ा हिस्सा गायत्री देवी, उनकी बेटी अंजनी सिंह और बेटे जय सिंह के नाम किए जाने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
अभिमन्यु सिंह का कहना है कि हरेंद्र पाल सिंह दिसंबर 1996 से गंभीर रूप से बीमार थे और बिस्तर पर थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनकी हालत ऐसी थी कि वह ठीक से लिखने-पढ़ने और लोगों को पहचानने की स्थिति में भी नहीं थे। ऐसे में मृत्यु से महज एक दिन पहले वसीयत तैयार होने का दावा संदेह पैदा करता है।
हालांकि, कथित वसीयत फर्जी है या वैध, यह जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिवार की सदस्य के कथित बयान का भी जिक्र
शिकायत में परिवार की सदस्य गिरजा कुमारी उर्फ गिरजा मनचंदानी के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, गिरजा कुमारी ने कहा था कि उनके सामने ऐसी कोई वसीयत तैयार नहीं हुई थी और कथित दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर भी वास्तविक नहीं हैं।
अभिमन्यु सिंह ने इस कथित बयान को अपने आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण बताया है। अब पुलिस दस्तावेजों के साथ-साथ संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज करेगी।
गवाह और अधिवक्ता की भूमिका पर उठाए सवाल
शिकायत के मुताबिक, कथित वसीयत में गवाह के तौर पर संदीप कुमार सिंह का नाम दर्ज है। अभिमन्यु सिंह ने उन पर भी कथित फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा शिकायत में गंगा सिंह और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर पर कथित वसीयत तैयार करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्व न्यायालय में नामांतरण कराया गया और बाद में पैतृक जमीनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
पहले भी अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं दोनों भाई
परिवार की संपत्ति को लेकर विवाद पहले भी सामने आ चुका है। चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह की ओर से इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात कही गई है। दोनों भाई एसएसपी और जिलाधिकारी से भी मुलाकात कर चुके हैं।
दूसरी ओर, दूसरे पक्ष की ओर से भी दोनों भाइयों पर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस के लिए सभी पक्षों के दावों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करना महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की
रोरावर थाना प्रभारी रविंद्र चंद्रवाल के मुताबिक, मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों की भी पड़ताल करेगी।
जांच के दौरान कथित वसीयत की वैधता, उस पर किए गए हस्ताक्षरों, दस्तावेज तैयार होने की परिस्थितियों, गवाहों की भूमिका और राजस्व अभिलेखों में हुए नामांतरण की प्रक्रिया की जांच की जाएगी।
पुश्तैनी संपत्ति विवाद का फैसला अदालत में भी जा सकता है
करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति और पुरानी हवेली से जुड़े इस विवाद में आपराधिक आरोपों की जांच पुलिस करेगी, जबकि संपत्ति पर वास्तविक अधिकार और कथित वसीयत की वैधता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के तहत हो सकता है। फिलहाल मुकदमे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।



