नेपाल में बाढ़ की तबाही के 5 दिन बाद भी हालात भयावह, 903 मौतें और 4247 लोग लापता; सामूहिक अंतिम संस्कार से बढ़ी चिंता

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की तबाही के पांच दिन बाद भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 903 तक पहुंच गया है, जबकि 4247 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। इस बीच कई ऐसे शव बरामद हुए हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है। पहचान से जुड़े जरूरी साक्ष्य सुरक्षित रखने और जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऐसे शवों का सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया जा रहा है। कई प्रभावित इलाकों में पानी का स्तर दोबारा बढ़ने से राहत और बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
नेपाल में 903 लोगों की मौत, 4247 अब भी लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की ताजा जानकारी के अनुसार, बाढ़ में अब तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 4247 लोग लापता हैं और 267 लोगों के घायल होने की जानकारी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। दूसरी ओर, चीन ने अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की है और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी है।
रविवार को भी प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी रहा। अब तक 9435 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। हालांकि, भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने से राहत दलों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और बिगड़ गई। तेज बहाव करीब तीन घंटे तक जारी रहने के बाद घ्यालचोक-चारौदी पुल बह गया। लगभग 130 मीटर लंबा यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक क्षेत्र को पृथ्वी राजमार्ग से जोड़ता था। पुल टूटने के बाद आसपास के करीब 400 परिवारों का मुख्य संपर्क मार्ग बंद हो गया है।
पुल टूटने से किसानों की मुश्किल बढ़ी
घ्यालचोक-चारौदी पुल स्थानीय लोगों के लिए आने-जाने के साथ-साथ कारोबार और कृषि उपज की आवाजाही का भी प्रमुख साधन था। आसपास के किसान इसी रास्ते से दूध और सब्जियां चारौदी की कृषि सहकारी संस्था तक पहुंचाते थे। पुल बहने के बाद उनकी उपज बाजार तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इससे पहले 26 अगस्त की बाढ़ में धवादिघाट पुल भी बह गया था। ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा वैकल्पिक रास्ता भी बंद हो गया।
बाढ़ के साथ आई गाद और मलबे ने कई क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। रसुवा में कई मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं। चीन सीमा से जुड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुआ था, जिससे राहत अभियान और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। हालांकि, सड़क मरम्मत के दौरान करीब 150 मीटर हिस्से को यातायात के लिए खोल दिया गया है और बाकी हिस्से में काम जारी है।
सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की चुनौती
सबसे कठिन बचाव अभियानों में से एक जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में चल रहा है। रसुवा के अपर त्रिशूली-1 परियोजना में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी काम कर रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञों की मदद से रसुवा में दो दिनों के भीतर 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी है। भारतीय टीम सुरंग के करीब तीन किलोमीटर अंदर तक जाकर लोगों की तलाश कर रही है।
चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में भी नेपाली सेना के साथ संयुक्त बचाव अभियान चलाया गया है। वहीं नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ए परियोजना की सुरंग में भी बचाव कार्य जारी है। रास्ता खोलने के लिए सेना के इंजीनियर नियंत्रित विस्फोट की मदद ले रहे हैं। मौके पर सेना, सशस्त्र पुलिस के खोजी कुत्तों और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों सहित करीब 90 लोगों की टीम तैनात है।
सुरंग के अंदर शुरुआत में करीब दो बाई तीन फीट का छोटा रास्ता बनाया गया था, लेकिन भीतर से कोई आवाज या हलचल नहीं मिली। इसके बाद भारी मशीनों की सहायता से रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर तेजी से पहुंच सके।
पहचान नहीं हो पाए शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से प्रशासन के सामने पहचान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई शवों की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में पहचान और जरूरी जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया जा रहा है। दूसरी ओर, जिन परिवारों के सदस्य लापता हैं, वे लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं। ऐसे में बरामद शवों की पहचान बचाव अभियान का अहम हिस्सा बनी हुई है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अब तक 9500 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद कई इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। पानी, कीचड़ और मलबे के कारण कई रास्ते बंद हैं, जिससे बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
रसुवा में तबाही के निशान, सड़कें और मकान तबाह
बाढ़ से रसुवा जिला बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई जगह नदियां गाद से भर गई हैं और पक्के मकान भी ढह गए हैं। चीन सीमा की ओर जाने वाली मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा बहने से राहत अभियान प्रभावित हुआ था। सड़क निर्माण दलों ने करीब 150 मीटर हिस्से को यातायात के लिए खोल दिया है, जबकि बाकी हिस्से की मरम्मत जारी है।
इसी क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी लगातार की जा रही है। बचाव दल दिन-रात अभियान चलाकर सुरंगों के अंदर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
9435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, अब तक 9435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बचाव और राहत अभियान के लिए कुल 394 हवाई उड़ानें संचालित की गईं, जिनमें रविवार को हुई 72 उड़ानें भी शामिल हैं।
जलविद्युत परियोजना वाले क्षेत्रों से 279 लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। जमीन पर नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र बल के कुल 20618 जवान राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
26 राहत केंद्रों में हजारों प्रभावितों को मदद
रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 26 अस्थायी राहत केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। रविवार को इन केंद्रों के माध्यम से 3454 लोगों को रहने की सुविधा और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। जिन क्षेत्रों में मकान और संपर्क मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, वहां ये केंद्र प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं।
बाढ़ में घायल 267 लोगों को निकालकर स्थानीय अस्पतालों और काठमांडू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 156 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकीय दल भी भेजे गए हैं, जहां लोगों को इलाज के साथ मानसिक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की चौथी खेप
भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी गई है। शनिवार रात भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल रवाना हुआ। इसमें सुरंग बचाव उपकरण, तकनीकी सामान और डीएनए जांच से संबंधित आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
भारत अब तक नेपाल को 68.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। इसमें दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल और स्वच्छता किट शामिल हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को दोबारा जोड़ने के लिए स्टील और बेली ब्रिज से जुड़ी सामग्री भी भेजी जा रही है।
मोबाइल नेटवर्क बहाली का काम जारी
बाढ़ के कारण नेपाल टेलिकॉम और एनसेल के कई मोबाइल टावर प्रभावित हुए थे। अब तक नेपाल टेलिकॉम के 106 और एनसेल के 75 टावर फिर से चालू किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में 20 उपग्रह फोन भेजे गए हैं, ताकि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने वाले इलाकों में बचाव दल आपस में संपर्क बनाए रख सकें।
फिलहाल राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचना है। कई स्थानों पर मलबे ने रास्ते रोक दिए हैं, जबकि जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में बचाव कार्य बेहद कठिन परिस्थितियों में जारी है। दूसरी ओर, नदियों का बढ़ता जलस्तर भी अभियान में बाधा बन रहा है। राहत टीमें अलग-अलग मोर्चों पर अभियान चलाकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।



