
असीम वकार के कांग्रेस में जाने की चर्चा से गरमाई यूपी की सियासत, ओवैसी की AIMIM को लग सकता है बड़ा झटका!
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रमुख सार्वजनिक चेहरे सैयद असीम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वकार बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उनकी ओर से अभी इस संबंध में आधिकारिक तौर पर न तो पुष्टि की गई है और न ही खंडन।
अगर असीम वकार कांग्रेस का दामन थामते हैं तो इसे उत्तर प्रदेश में AIMIM के लिए अहम राजनीतिक झटका माना जा सकता है। वकार लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं और उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियों, नीतियों तथा राजनीतिक रुख को सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से रखने वाले प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है।
AIMIM से क्यों असंतुष्ट बताए जा रहे असीम वकार?
एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि असीम वकार पिछले कुछ समय से AIMIM की उत्तर प्रदेश इकाई से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असंतुष्ट चल रहे थे। इसी बीच उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा सामने आई है। हालांकि, उनकी नाराजगी की वजह को लेकर वकार की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
AIMIM में आने से पहले असीम वकार का समाजवादी पार्टी से भी लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। बताया जाता है कि वह करीब दो दशक तक सपा से जुड़े रहे। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका अनुभव अलग-अलग राजनीतिक खेमों के बीच रहा है।
इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, असीम वकार को कांग्रेस में लाने में पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की अहम भूमिका बताई जा रही है। यदि वकार कांग्रेस में शामिल होते हैं तो इसे उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, उनके कांग्रेस में जाने को लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
ओवैसी की यूपी में क्या है चुनावी रणनीति?
असीम वकार के संभावित कांग्रेस प्रवेश की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब AIMIM उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। असदुद्दीन ओवैसी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, पार्टी कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
ओवैसी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में AIMIM का संगठन पहले के मुकाबले मजबूत हुआ है। पार्टी खुद को जनता के बीच एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
‘वोटकटवा’ की छवि बदलने की कोशिश में AIMIM
उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM को लंबे समय से विपक्षी दलों की ओर से ‘वोटकटवा’ पार्टी कहकर निशाना बनाया जाता रहा है। ओवैसी इस धारणा को बदलने की कोशिश करते रहे हैं। उनका कहना है कि AIMIM किसी दूसरे दल के वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में उतरती है।
पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहने पर उन सीटों पर उसका दावा मजबूत हो सकता है, जहां संगठन और जनाधार में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में AIMIM के प्रमुख प्रवक्ता और सार्वजनिक चेहरों में शामिल रहे असीम वकार का संभावित रूप से पार्टी से अलग होना उसकी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस, सपा और AIMIM की नजर
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में मुस्लिम मतदाता कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM समेत कई राजनीतिक दल इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के साथ चुनावी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है। ऐसे में कांग्रेस के साथ किसी चर्चित राजनीतिक चेहरे का जुड़ना उसके लिए चुनावी और संगठनात्मक स्तर पर अहम माना जा सकता है। असीम वकार के संभावित कांग्रेस प्रवेश को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या वकार के जाने से कमजोर पड़ेगा AIMIM का यूपी प्लान?
असीम वकार का कांग्रेस में शामिल होना फिलहाल संभावित घटनाक्रम है और इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है। ऐसे में अभी यह तय करना जल्दबाजी होगी कि उनके जाने से AIMIM के चुनावी समीकरण किस हद तक प्रभावित होंगे।
हालांकि, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किसी प्रमुख चेहरे के पार्टी छोड़ने की स्थिति AIMIM के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है। वहीं, कांग्रेस को वकार के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का मौका मिल सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि असीम वकार बुधवार को वास्तव में कांग्रेस में शामिल होते हैं या नहीं। अगर ऐसा होता है तो यह भी देखना अहम होगा कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी इस संभावित सियासी झटके के बाद उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।



