उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल क्लिनिकल इलाज तक सीमित न हों

सहानुभूति, सामाजिक समावेश, अधिकारों का सम्मान व मदद हो शामिल
KGMU में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के मनोरोग विभाग ने शनिवार को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों के निजी अनुभवों, सम्मान, समाज में उनकी भागीदारी और सार्थक सहयोग के महत्व पर ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम में उन लोगों की बात सुनने और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उन्हें आने वाली असली चुनौतियों को समझने पर ज़ोर दिया गया, जिन्हें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव रहा है। इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल क्लिनिकल इलाज तक सीमित न हों, बल्कि उनमें सहानुभूति, सामाजिक समावेश, व्यक्तिगत अधिकारों का सम्मान और ठीक होने में मदद भी शामिल हो।

कार्यक्रम की शुरुआत मनोरोग ओपीडी में बीएससी नर्सिंग इंटर्न द्वारा प्रस्तुत एक नुक्कड़ नाटक से हुई, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के महत्व और मानसिक अस्वस्थता से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके बाद केजीएमयू के मनोरोग विभाग की प्रो. (डॉ.) वंदना गुप्ता ने ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ की थीम के बारे में जानकारी दी। फिर एमएसडब्ल्यू इंटर्न ने एक लघु नाटक (स्किट) के ज़रिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, समझ और समाज में स्वीकार्यता का संदेश दिया।

डॉ. सुजिता कुमार कर द्वारा आयोजित एक फ़िल्म स्क्रीनिंग ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों पर सोचने और चर्चा करने का मौका दिया। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण “निजी अनुभवों को साझा करना” सत्र था, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों और उनकी देखभाल करने वालों को अपनी निजी यात्रा, चुनौतियों, देखभाल और ठीक होने के अनुभवों तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और समाज से अपनी उम्मीदों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस सत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ लेने वाले लोगों और उनके परिवारों की बात सुनी जाए, उनका सम्मान किया जाए और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फ़ैसलों में उन्हें सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।

प्रो. (डॉ.) अमित आर्य ने सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुझावों पर एक प्रस्तुति दी। प्रो. श्वेता सिंह ने भलाई और मुश्किलों से उबरने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. अमित सिंह ने मरीज़ों के साथ अपने अनुभव साझा किए और बेहतर नतीजों के लिए बिना दवा वाले इलाज के महत्व पर ज़ोर दिया। रिक्रिएशनल थेरेपिस्ट सुमन ने मनोसामाजिक पुनर्वास के महत्व को रेखांकित किया। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट रवि शंकर ने टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ‘टेली मानस’ हेल्पलाइन नंबर 14416 की जानकारी दी। इस कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रसाद कन्नेकांती के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों, फैकल्टी सदस्यों, नर्सिंग इंटर्न, एमएसडब्ल्यू इंटर्न, देखभाल करने वालों और आयोजन टीम के योगदान को सराहा।

इस पहल के ज़रिए केजीएमयू के मनोरोग विभाग ने सहानुभूतिपूर्ण, व्यक्ति-केंद्रित और समावेशी मानसिक स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि लोगों के वास्तविक अनुभवों को सुनना, असल चुनौतियों को समझने और उन अनुभवों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक सहयोग में सार्थक सुधारों में बदलने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है। केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रो. सोनिया नित्यानंद ने ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ के मौके पर सार्थक गतिविधियां आयोजित करने के लिए मनोरोग विभाग के प्रयासों की सराहना की।

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