शिमला में सुबह-सुबह भूकंप से कांपी धरती, रिक्टर स्केल पर 4.1 रही तीव्रता

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई। भूकंप सुबह 4 बजकर 36 मिनट पर आया। हिमालयी क्षेत्र में भूगर्भीय गतिविधियों के कारण भूकंप का खतरा बना रहता है।
सुबह 4:36 बजे आया भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, शिमला में सुबह आए भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई। पहाड़ी इलाकों में धरती के भीतर होने वाली हलचल भूकंप की प्रमुख वजहों में शामिल है। हिमालय जैसे सक्रिय पर्वतीय क्षेत्रों में टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के चलते समय-समय पर भूकंपीय घटनाएं होती रहती हैं।
क्यों आते हैं भूकंप?
पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार बेहद धीमी गति से चलती रहती हैं। जब इनके किनारे आपस में टकराते हैं, फंस जाते हैं या एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकते हैं, तो चट्टानों में तनाव बढ़ने लगता है और ऊर्जा जमा होती रहती है।
जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं। इन तरंगों के धरती की सतह तक पहुंचने पर कंपन महसूस होता है, जिसे भूकंप कहा जाता है।
हिमालयी क्षेत्र में क्यों बना रहता है भूकंप का खतरा?
हिमालय भूगर्भीय रूप से सक्रिय पर्वतीय क्षेत्र है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ रही है। दोनों प्लेटों के बीच होने वाली गतिविधियों से धरती के भीतर तनाव जमा होता रहता है। इसी कारण हिमाचल प्रदेश समेत हिमालयी राज्यों में भूकंप का जोखिम बना रहता है।
हालांकि, किसी क्षेत्र में भूकंप का खतरा होने का अर्थ यह नहीं है कि वहां हर समय बड़ा भूकंप आएगा। फिलहाल भूकंप की सटीक तारीख, समय और स्थान का विश्वसनीय पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है। ऐसे में भूकंप के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहना और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।



