पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप से भड़की हिंसा, घर-दुकान में लगाई आग; डर के साए में 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद तनाव और हिंसा की घटना सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम भीड़ ने आरोपी के घर और दुकान में आग लगा दी। घटना के बाद संभावित हमले के डर से 35 से अधिक ईसाई परिवार गांव छोड़कर चले गए। यह मामला एक बार फिर पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
व्हाट्सऐप ग्रुप में वीडियो साझा करने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना पंजाब प्रांत के घड़ियाल कलां गांव की है। यहां 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति कामरान मसीह एक छोटी फार्मेसी चलाते हैं। बताया गया है कि घटना से एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उन पर व्हाट्सऐप ग्रुप में ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था।
हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले के सभी तथ्यों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों को साबित हुआ अपराध नहीं माना जा सकता।
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही गांव में तनाव
‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ की रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से बताया गया कि कामरान मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैलने के बाद उनके परिवार और गांव के अन्य ईसाई परिवारों में डर का माहौल बन गया। संभावित हमले की आशंका के चलते कई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोग कामरान की दुकान और घर के पास जमा हुए। वहां विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों इमारतों में आग लगा दी गई। इसके बाद हिंसा बढ़ने की आशंका से 35 से अधिक ईसाई परिवारों ने गांव छोड़ दिया। इस घटना ने स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों पर फिर उठे सवाल
पाकिस्तान में ईशनिंदा से जुड़े कानून लंबे समय से विवादों में रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन कानूनों के तहत लगाए जाने वाले आरोपों का इस्तेमाल कभी-कभी निजी दुश्मनी या विवादों में भी किया जा सकता है। धार्मिक अल्पसंख्यकों को ऐसे मामलों में विशेष जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था। समूह ने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा देने में नाकामी जैसे मुद्दे उठाए थे।
मानवाधिकार संगठन ने न्याय व्यवस्था पर जताई चिंता
‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) ने ईशनिंदा कानूनों को पाकिस्तान के सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक बताया है। संगठन के मुताबिक, इन कानूनों के कथित दुरुपयोग का धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गंभीर असर पड़ता है। संगठन ने न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
वीओपीएम का कहना है कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल सकता है। संगठन ने यह चिंता भी जताई कि आरोपों की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार को सामाजिक दबाव तथा हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।
रिमशा मसीह का मामला भी चर्चा में
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी ईसाई लड़की रिमशा मसीह के मामले का भी उल्लेख किया। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित रिमशा पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था। बाद में मामले में आरोपों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे और उसे रिहा कर दिया गया।
इस मामले को अक्सर पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े जोखिमों के उदाहरण के रूप में पेश किया जाता है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच होने से पहले ही आरोपी और उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
पाकिस्तान में सामने आई इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, भीड़ की हिंसा पर नियंत्रण और कानून के निष्पक्ष इस्तेमाल की जरूरत को रेखांकित किया है। मानवाधिकार संगठनों ने ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
कामरान मसीह पर लगाए गए आरोपों की सत्यता का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। किसी भी आरोप के आधार पर हिंसा, आगजनी या किसी समुदाय को घर छोड़ने के लिए मजबूर करना कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंता है।



