
नई दिल्ली: गुजरात के राजकोट में नवरात्र के दौरान आयोजित अहीर गरबा महोत्सव में पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां अहीर समाज की 15 हजार से अधिक महिलाएं करीब 900 किलोग्राम सोने के आभूषण पहनकर रास-गरबा करने पहुंचीं। इन गहनों की अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजी महिलाओं की सामूहिक प्रस्तुति इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही।
सोने के गहनों से सजी महिलाओं ने किया पारंपरिक रास-गरबा
राजकोट में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर शामिल हुईं। किसी के गले में सोने के हार थे, तो किसी ने कंगन और अन्य आभूषण पहन रखे थे। मैदान में एक साथ हजारों महिलाओं की मौजूदगी और उनके सामूहिक रास-गरबा ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।
महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में नृत्य कर अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। सोने के गहनों की चमक और पारंपरिक पहनावे ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अहीर सेना की ओर से किया गया महोत्सव का आयोजन
इस गरबा महोत्सव का आयोजन अहीर सेना की ओर से किया गया है। इसका उद्देश्य नवरात्र के अवसर पर अहीर समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना है। आयोजन में समाज के महिला और पुरुष सदस्य लगातार नौ दिनों तक पारंपरिक शैली में रास-गरबा कर रहे हैं।
नवरात्र के दौरान चल रहे इस कार्यक्रम में समाज के लोगों का उत्साह देखने को मिल रहा है। सामूहिक भागीदारी के जरिए लोग अपनी परंपराओं से जुड़ रहे हैं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
महोत्सव के सातवें दिन महिलाओं की बड़ी भागीदारी
महोत्सव के सातवें दिन महिलाओं की भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक कपड़ों और सोने के आभूषणों के साथ गरबा मैदान पहुंचीं। इसके बाद सामूहिक रूप से रास-गरबा किया गया।
एक साथ हजारों महिलाओं का पारंपरिक शैली में नृत्य करना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बना। इस दौरान महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप रास खेला और उत्सव में हिस्सा लिया।
900 किलो सोना, गहनों की कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक
इस आयोजन की चर्चा की एक बड़ी वजह महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के आभूषणों की मात्रा और उनकी अनुमानित कीमत है। जानकारी के मुताबिक, 15 हजार से अधिक महिलाओं के पास कुल करीब 900 किलोग्राम सोने के गहने थे। इनकी कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
हालांकि, यह कीमत अनुमानित बताई गई है। इसके बावजूद सोने के आभूषणों की विशाल मात्रा ने राजकोट के इस महोत्सव को खास पहचान दिलाई है।
अहीर समाज में रास-गरबा की खास सांस्कृतिक पहचान
अहीर समाज में पारंपरिक रास-गरबा का विशेष सांस्कृतिक महत्व है। नवरात्र के दौरान ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामुदायिक मेलजोल और परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी देते हैं।
राजकोट के इस महोत्सव में महिलाओं की बड़ी भागीदारी, पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक नृत्य के जरिए समाज की सांस्कृतिक पहचान सामने आई। आयोजन की खासियत केवल सोने के गहने नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं के प्रति लोगों का जुड़ाव भी रहा।
गुजरात में नवरात्र के दौरान गरबा और रास बड़े स्तर पर आयोजित किए जाते हैं। राजकोट का अहीर गरबा महोत्सव इसी परंपरा की एक झलक है, जहां लगातार नौ दिनों तक समाज के लोग पारंपरिक अंदाज में उत्सव मना रहे हैं।



