‘रिजीम चेंज गैंग’ पर बरसे शिवराज सिंह चौहान, बोले- पीएम मोदी पर जनता को भरोसा, सत्ता बदलने की कोशिशें नहीं होंगी सफल

भोपाल: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की मांग करने वालों की दाल नहीं गलने वाली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर देश के करोड़ों लोगों को पूरा भरोसा है। युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों का विश्वास ही ऐसी मुहिम चलाने वालों की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
‘जनता को उस नेतृत्व पर भरोसा, जिसने दुनिया में भारत का मान बढ़ाया’
शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष और सत्ता परिवर्तन की मांग करने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि देश के युवाओं, किसानों, माताओं और बहनों को अपने नेतृत्व की क्षमता पर भरोसा है। उनके मुताबिक, जनता ऐसे नेतृत्व के साथ खड़ी है, जिसने दुनिया के सामने भारत का मस्तक ऊंचा किया और देश को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना सिखाया।
उन्होंने कहा कि आज का भारत झूठे नैरेटिव से गुमराह नहीं होता, न षड्यंत्रों से डरता है और न ही देश को कमजोर करने वाली सोच के सामने झुकता है। सरकार के लिए देश का सम्मान और 140 करोड़ नागरिकों का भविष्य सर्वोपरि है।
‘जनता का विश्वास किसी नैरेटिव का मोहताज नहीं’
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जनता का विश्वास केवल प्रचार या किसी नैरेटिव से नहीं बनता, बल्कि काम, संकल्प और नेतृत्व की ईमानदारी से हासिल होता है। उन्होंने दावा किया कि यही नए भारत की ताकत है और यही जनता का भरोसा सत्ता परिवर्तन की मुहिम चलाने वालों के सपनों को बार-बार नाकाम कर रहा है।
इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान विपक्ष पर आरोप लगा चुके हैं कि ‘रिजीम चेंज गैंग’ रोज सत्ता परिवर्तन के सपने देखता है, षड्यंत्र रचता है, झूठ फैलाता है और अपने हिसाब से नैरेटिव गढ़ता है। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे प्रयास साबुन के बुलबुले की तरह बिखर जाते हैं।
विश्वविद्यालयों और चुनावी नतीजों का भी किया जिक्र
शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की विभिन्न विश्वविद्यालयों में जीत और स्थानीय चुनावों के नतीजों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी की सफलता का जिक्र किया।
इसके साथ ही उन्होंने गुजरात के नगरीय निकाय चुनावों तथा असम, बंगाल और पुडुचेरी के उपचुनावों के नतीजों को भी अपनी दलील के समर्थन में रखा। चौहान के मुताबिक, इन परिणामों से जनता के रुझान का पता चलता है।
उन्होंने कहा कि गांव हो या शहर, युवा हों या आम नागरिक, जनता का मूड सत्ता परिवर्तन की मुहिम चलाने वालों की सोच से अलग है। हर हार के बाद ऐसे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनकी कोशिशें जनता के बीच असर क्यों नहीं दिखा पा रही हैं।



