दिल्ली-वाराणसी से मुंबई-पुणे तक दौड़ सकती है बुलेट ट्रेन, 7 नए हाई-स्पीड रूट्स का प्लान चर्चा में

नई दिल्ली: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम जारी है। इसी बीच देश में सात और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना का जिक्र किया गया है। खबर के मुताबिक, इन प्रस्तावित कॉरिडोरों की कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर और अनुमानित निवेश लगभग 16 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। इन योजनाओं के अमल में आने पर बड़े शहरों के बीच यात्रा का समय घटाने और व्यापार, रोजगार तथा पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन सातों मार्गों को प्रस्तावित योजना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली-वाराणसी का सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में
प्रस्तावित मार्गों में दिल्ली से वाराणसी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर शामिल है। खबर के अनुसार, इस रूट पर बुलेट ट्रेन चलने से दोनों शहरों के बीच यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के साथ बिहार और पश्चिम बंगाल के यात्रियों को भी बेहतर संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। धार्मिक पर्यटन और राजधानी तक आवागमन के लिहाज से भी इस मार्ग को अहम माना जा रहा है।
मुंबई-पुणे के बीच 48 मिनट में पहुंचने की योजना
मुंबई और पुणे के बीच भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर प्रस्तावित है। खबर में अनुमान जताया गया है कि इस मार्ग पर यात्रा का समय घटकर करीब 48 मिनट रह सकता है। इससे दोनों शहरों के बीच रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों, कारोबारियों और विद्यार्थियों को सुविधा मिल सकती है। मुंबई और पुणे के आर्थिक तथा औद्योगिक संबंधों को देखते हुए यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुणे-हैदराबाद के बीच भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
प्रस्तावित योजनाओं में पुणे से हैदराबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने का मार्ग भी शामिल है। खबर के मुताबिक, इस कॉरिडोर पर दोनों शहरों के बीच यात्रा में करीब 1 घंटा 55 मिनट लगने का अनुमान है। इससे महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच आवागमन आसान हो सकता है और कारोबार तथा रोजगार से जुड़े लोगों को फायदा मिलने की संभावना है।
हैदराबाद-बेंगलुरु का सफर दो घंटे से कम करने का लक्ष्य
हैदराबाद और बेंगलुरु के बीच भी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना बताई गई है। खबर के अनुसार, इस मार्ग पर बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा दो घंटे से कम समय में पूरी हो सकती है। दोनों शहर सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में तेज रेल संपर्क से कारोबार और कामकाज के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है।
हैदराबाद-चेन्नई के बीच 2 घंटे 55 मिनट का अनुमान
प्रस्तावित सात मार्गों में हैदराबाद और चेन्नई के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी शामिल है। खबर में इस दूरी को करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरा करने का अनुमान दिया गया है। इस संपर्क से रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा के लिए दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा, दक्षिण भारत के अन्य क्षेत्रों को भी बेहतर संपर्क मिल सकता है।
चेन्नई-बेंगलुरु के बीच सिर्फ 1 घंटा 13 मिनट का सफर
चेन्नई और बेंगलुरु के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना भी सामने आई है। खबर के मुताबिक, इस मार्ग पर यात्रा का समय घटकर करीब 1 घंटा 13 मिनट रह सकता है। चेन्नई के बंदरगाहों और विनिर्माण क्षेत्र को बेंगलुरु के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों से जोड़ने में यह मार्ग अहम भूमिका निभा सकता है। इससे दोनों शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों और यात्रियों की आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है।
वाराणसी-सिलीगुड़ी मार्ग से पूर्वी भारत को जोड़ने की तैयारी
पूर्वी भारत में वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच भी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित है। खबर के अनुसार, यह मार्ग पटना से होकर गुजर सकता है और इस पर यात्रा का अनुमानित समय करीब 2 घंटे 55 मिनट बताया गया है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। व्यापार, कृषि और क्षेत्रीय आवागमन के लिहाज से भी यह मार्ग उपयोगी हो सकता है।
रेल नेटवर्क के विस्तार पर सरकार का जोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। इसके साथ ही वंदे भारत और वंदे भारत स्लीपर जैसी रेल सेवाओं के विस्तार के बीच प्रस्तावित नए कॉरिडोर देश में तेज रेल संपर्क विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
हालांकि, सातों नए कॉरिडोरों की घोषणा, मंजूरी, निर्माण की समयसीमा और वास्तविक यात्रा समय की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए प्रस्तावित मार्गों और उनमें बताए गए यात्रा समय को फिलहाल योजना संबंधी जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



