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शरद पूर्णिमा पर रातभर क्यों जागते हैं लोग? मां लक्ष्मी से जुड़ी है खास मान्यता, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और रात में अमृत वर्षा होती है। इसी वजह से चांदनी में खीर रखने और रातभर जागकर पूजा-अर्चना करने की परंपरा प्रचलित है। लेकिन शरद पूर्णिमा पर जागरण क्यों किया जाता है और इसका मां लक्ष्मी से क्या संबंध है? आइए जानते हैं।

कोजागरी का क्या है अर्थ?

कोजागरी शब्द का संबंध संस्कृत के ‘के जागर्ति’ से माना जाता है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है’। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं। इस दौरान वे देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। इसी मान्यता के चलते भक्त रातभर जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।

मां लक्ष्मी से क्या है शरद पूर्णिमा का संबंध?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो भक्त इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और चंद्र दर्शन करते हैं, उन पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी का जागरण करने से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है।

मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा

शरद पूर्णिमा की शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि तथा खुशहाली आती है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करके देवी का आशीर्वाद मांगते हैं।

शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा की रात निशिता काल में मां लक्ष्मी की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। इस साल लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक बताया गया है। भक्त इस अवधि में पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

शरद पूर्णिमा का चांद कब दिखाई देगा?

शरद पूर्णिमा का चंद्रमा 25 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजकर 55 मिनट पर दिखाई देने की जानकारी दी गई है। हालांकि, अलग-अलग शहरों और स्थानों पर चंद्रोदय के समय में कुछ अंतर हो सकता है।

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