देहरादून (राम कुमार सिंह): उत्तराखंड को नशामुक्ति बनाने के अभियान के तहत देहरादून में ड्रग फ्री उत्तराखंड वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इसे ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ओएनजीसी डॉ. बीआर आंबेडकर मैदान से वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पूरे भारत को नशा-मुक्त (Drug-Free India) बनाने का तीन साल का रोडमैप और बड़ा लक्ष्य घोषित किया है। उसी लाइन पर धामी सरकार ने उत्तराखंड को नशा मुक्त राज्य बनाने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामीन कहा कि यह वॉकथान केवल एक आयोजन नहीं है बल्कि समाज को जागरूक करने , संवेदनशील बनाने और स्वस्थ्य और सशक्त उत्तराखंड बनाने का संदेश देने वाला अभियान है। नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है, इसलिए इसपर निर्णायक प्रहार होना चाहिए।

सीएम धामी ने युवाओं से खेल, योग , व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और अच्छी संगति, सकारात्मक सोच अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा इस अभियान में केवल सहभागी ही नही बल्कि नेतृत्वकर्ता भी बने और दूसरों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करें।

आपको बता दें कि उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने “ड्रग्स मुक्त उत्तराखंड” मिशन के तहत एक व्यापक और त्रिस्तरीय (थ्री-टियर) रणनीति तैयार की है। इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य देवभूमि के युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालना और नशा तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह से तबाह करना है। सरकार ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन (मास मूवमेंट) का रूप दिया है।

धामी सरकार की इस रणनीति के प्रमुख स्तंभ और प्रमुख कदम हैं:
कड़ा कानून और प्रवर्तन (Enforcement) एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का प्रवर्तन: राज्य में नशा माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को पहले से ज्यादा मजबूत और सक्रिय किया गया है।

उत्तराखंड का पहला एंटी-नारकोटिक्स थाना : राज्य सरकार रुद्रपुर में उत्तराखंड का पहला विशेष एंटी-नारकोटिक्स पुलिस थाना खुल जा रही है। अंतरराष्ट्रीय (नेपाल) और अंतरराज्यीय (पंजाब) सीमाओं से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए इसे आतंकवाद रूप से स्थापित किया जा रहा है।

प्रतिबंधात्मक कदम: हाल ही में सरकार ने जनस्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य को देखते हुए पूरे प्रदेश में तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों (पान मसाला/गुटका) पर एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
बॉर्डर पर चेकिंग: सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता, रात्रिकालीन चेकिंग और तस्करों के खिलाफ सख्त एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत जेल भेजने की कार्रवाई तेज की गई है।
जेलों में नशा मुक्ति केंद्र: एक अनूठी पहल के तहत धामी सरकार उत्तराखंड की सभी प्रमुख जेलों और उप-जेलों में नशा मुक्ति केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रही है ताकि नशे के आदी कैदियों का सही इलाज और काउंसलिंग की जा सके। इसमें 16 वर्ष से कम उम्र के किशोरों और महिला बंदियों पर विशेष फोकस है।
आधुनिक रीह्याब सेंटर्स: राज्य में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी खुद मैदान में उतरकर युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। हाल ही में देहरादून और हल्द्वानी में “नशा मुक्त उत्तराखंड वॉकथॉन” और “रन फॉर अवेयरनेस” जैसी मैराथन आयोजित की गईं, जिसका संदेश “नशे को ना और जिंदगी को हां” (Say no to drugs, and yes to life) है। नशामुक्त समाज के लिए 10 सूत्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ देहरादून घोषणापत्र जारी किया गया है जिसमें परिवारों और समुदायों की भूमिका तय की गई है। स्कूलों और कॉलेजों को इस जंग का मुख्य मंच बनाया गया है। युवाओं को खेलों और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए ‘दगड़िया क्लब’ का गठन किया गया है।




