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प्रिंसेस गैम्बिट: महज 11 साल की उम्र में बोधना शिवानंदन ने रचा इतिहास, इंटरनेशनल मास्टर बनने वाली सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बनीं

लंदन: ब्रिटिश-भारतीय शतरंज प्रतिभा बोधना शिवानंदन ने महज 11 वर्ष की उम्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने उन्हें दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया है। तमिल मूल की बोधना ने इंटरनेशनल मास्टर (आईएम) खिताब की सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर इतिहास रच दिया है। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस सफलता के साथ हंगरी की दिग्गज शतरंज खिलाड़ी जूडित पोल्गार का करीब 38 साल पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया है।

लंदन के उपनगर हैरो में रहने वाली बोधना ने मोंटेनेग्रो के बुडवा में आयोजित यूरोपीय महिला क्लब कप के अंतिम दौर में निर्णायक जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने शतरंज की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

जूडित पोल्गार का 38 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

बोधना शिवानंदन ने हंगरी की महान शतरंज खिलाड़ी जूडित पोल्गार का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। पोल्गार ने वर्ष 1988 में 12 साल की उम्र में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल किया था। अब बोधना ने उनसे भी कम उम्र में इस उपलब्धि की शर्तें पूरी कर ली हैं।

जूडित पोल्गार को शतरंज इतिहास की महानतम महिला खिलाड़ियों में गिना जाता है। वह दुनिया की शीर्ष 10 ओपन रैंकिंग में जगह बनाने में सफल रही थीं और उन्होंने कई दिग्गज पुरुष ग्रैंडमास्टर्स के खिलाफ भी प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेले थे। ऐसे में उनका रिकॉर्ड तोड़ना बोधना के करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

अंतिम मुकाबले में जीत से पूरा किया लक्ष्य

यूरोपीय महिला क्लब कप के शुरुआती दौर में बोधना को पूर्व महिला विश्व चैंपियनशिप चैलेंजर ग्रैंडमास्टर एलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने इसके बाद शानदार वापसी की और सात मुकाबलों में कुल 5.5 अंक हासिल किए।

प्रतियोगिता के अंतिम दौर में बोधना ने स्वीडन की महिला इंटरनेशनल मास्टर विक्टोरिया जोहानसन को 32 चालों में हरा दिया। उनकी इस जीत से उनकी टीम शी प्लेज टू विन लायनेसेस ए ने मुकाबले में 4-0 से जीत दर्ज की।

इस प्रदर्शन के साथ बोधना ने अपना तीसरा और अंतिम इंटरनेशनल मास्टर नॉर्म हासिल किया। साथ ही, उन्होंने आवश्यक 2400 लाइव रेटिंग की सीमा भी पार कर ली। इन उपलब्धियों के आधार पर वह इंटरनेशनल मास्टर खिताब हासिल करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में भी शामिल हो गईं।

वूमन ग्रैंडमास्टर खिताब में भी बना चुकी हैं रिकॉर्ड

बोधना की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका है। इससे पहले भी वह वूमन ग्रैंडमास्टर खिताब की आवश्यक शर्तें पूरी करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। शतरंज में इंटरनेशनल मास्टर खिताब, ग्रैंडमास्टर के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओपन खिताब माना जाता है।

जनवरी 2026 से बोधना को प्रशिक्षण दे रहे ग्रैंडमास्टर मेर्ट एर्दोग्दु के मुताबिक, उनकी प्रगति के पीछे शतरंज के प्रति गहरा लगाव और नियमित अभ्यास की अहम भूमिका है। वह हर सप्ताह चार दिन कड़ा अभ्यास करती हैं।

इंग्लिश चेस फेडरेशन के अंतरराष्ट्रीय शतरंज एवं बाहरी संबंध निदेशक और इंटरनेशनल मास्टर मैल्कम पेन ने भी बोधना की प्रतिभा की सराहना की है। उन्होंने उन्हें असाधारण प्रतिभा बताते हुए कहा कि इस स्तर की खिलाड़ी पीढ़ियों में कभी-कभार ही देखने को मिलती हैं।

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