उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हो हिस्सेदारी: शिवकन्या कुशवाहा

महात्मा फुले फाउंडेशन ने मनाई भारत रत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती

लखनऊ : जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी हर क्षेत्र में होनी चाहिए समाज में एक समान शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। यह बातें जन अधिकार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकन्या कुशवाहा ने शनिवार को महात्मा फुले फाउंडेशन के तत्वावधान में डॉ. भीमराव अम्बेडकर ऑडिटोरियम ला कालेज में आयोजित भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जिन्हें हम सब ‘मिसाइल मैन इण्डिया के नाम से जानते है, भारत के महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं 11वें राष्ट्रपति थे। उन्हे 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। जिन्होने अग्नि और पृथ्वी जैसी स्वदेशी मिसाइलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा ISRO और DRDO के साथ मिलकर देश को रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रसस्त किया। उनका जीवन सादगी ज्ञान और युवाओं को प्रेरणा देने का प्रतीक रहा। वे हमेशा कहा करते थे सपने वो नहीं जो हम नींद में देखें, सपने वो है जो हमें सोने न दें। उन्होंने कहा इंतजार करने वाले को सिर्फ उतना ही मिलता है जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं। समारोह में पूरे प्रदेश से लगभग 20 हजार लोग पहुंचे और संविधान की रक्षा का प्रण लिया।

प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा और समान अवसर मिलना चाहिए : बाबू सिंह कुशवाहा

इस अवसर पर सांसद जौनपुर, संस्थापक जन अधिकारी पार्टी बाबू सिंह कुशवाहा ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा डॉ.कलाम का जीवन संघर्ष, सादगी, मेहनत, शिक्षा और राष्ट्रसेवा की मिसाल है। उन्होंने देश के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपने विचारों से देश के करोड़ों युवाओं को सपने देखने तथा उन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा दी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का मानना था कि देश का भविष्य उसके बच्चों और युवाओं के हाथों में है। यदि देश को मजबूत और विकसित बनाना है तो प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा, समान अवसर और आगे बढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए। हमें डॉ. कलाम के विचारों को अपने जीवन में उतारते हुए शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक न्याय और समान अवसर के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। सांसद ने डॉ. कलाम की जयंती पर सभी से संकल्प लेने का आग्रह किया कि हम ‘शिक्षा को मजबूत करने, युवाओं को आगे बढ़ाने, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने तथा समाज में समानता, भाईचारा और न्याय स्थापित करने’ के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे।

डॉ. कलाम ने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताया और युवाओं को विज्ञान, नवाचार एवं राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उनके विचारों में शिक्षा, समानता और समावेशी विकास का स्पष्ट संदेश था बाबू सिंह कुशवाहा का मानना है- संविधान को बचाना हम सभी का कर्तब्य है यही हमारे अधिकारों की सुरक्षा का आधार है। सबको समान शिक्षा उपलब्ध कराना ही सच्चा सामाजिक न्याय है। समाज में समता, सम्मान और अधिकार सबके के लिए सुनिश्चित होना चाहिये। गरीब, वंचित और महिलाओं को आगे बढ़ाना ही राष्ट्र निर्माण की पहली सीढ़ी है। हम सब मिलकर डॉ. कलाम जी के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा के प्रति समर्पण सामाजिक सद्भाव और विकसित भारत के सपने को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। नयी पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने तथा ज्ञान मेहनत मानदारी और मानवता के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करें। धर्म को राजनीति से अलग रखना होगा तभी लोकतंत्र जीवित रहेगा। संविधान इंसानियत और मानवता का पाठ पढ़ाता है। प्रदेश महासचिव राजेश कुशवाहा ने सभी का आभार जताया।

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