डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट प्रेस की आज़ादी का उल्लंघन नहीं करता: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (28 अक्टूबर, 2026) को कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट प्रेस की आज़ादी का उल्लंघन नहीं करता है, और कहा कि संविधान पत्रकारिता की आज़ादी की गारंटी देता है।
मीडिया से बात करते हुए, श्री वैष्णव ने कहा: “पत्रकारिता की आज़ादी की गारंटी संविधान देता है। वह आज़ादी पूरी तरह से उपलब्ध है। पत्रकारिता की आज़ादी पर असर डालने का कोई इरादा भी नहीं है।” उन्होंने एडिटर्स और मीडिया प्रोफेशनल्स को कानून से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए सरकार के साथ खुली बातचीत करने के लिए बुलाया।
उल्लेखनीय है कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP Act) भारत का प्रमुख कानून है, जिसे नागरिकों के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए 11 अगस्त 2023 को संसद द्वारा पारित किया गया था। इसके नियम (DPDP Rules, 2025) नवंबर 2025 में अधिसूचित किए गए थे।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, कानून का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत निजता की रक्षा करना और वैध डेटा प्रोसेसिंग की अनुमति देना है।
नियमों के अनुसार 4 सदस्यीय डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की स्थापना की गई है। यह बोर्ड डेटा उल्लंघनों की जांच करेगा और विवादों की सुनवाई दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) में होगी।
डेटा सुरक्षा में विफलता या गंभीर उल्लंघनों पर कंपनियों पर 50 करोड़ रुपये से लेकर 250 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके पूर्ण अनुपालन के लिए 18 महीने की अवधि निर्धारित की गई है जो मई 2027 तक पूरी होगी।
एक्ट में डेटा फिड्यूशरी (Data Fiduciary) का प्रावधान है। जो संस्थाएं या कंपनियां आपका डेटा एकत्र करती हैं और उसका प्रसंस्करण करती हैं, उन्हें डेटा फिड्यूशरी कहा जाता है। उन्हें डेटा सुरक्षित रखने और उपयोगकर्ता की सहमति लेने की आवश्यकता होती है।



