रामलीला मैदान की रैली से गैरहाजिरी पड़ी भारी, युवा कांग्रेस के 215 पदाधिकारी निलंबित; MP के सबसे ज्यादा नाम

नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित विपक्षी दलों की रैली में शामिल नहीं होने पर युवा कांग्रेस ने आठ राज्यों के कम से कम 215 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह रैली एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित की गई थी। निलंबित किए गए पदाधिकारियों में मध्य प्रदेश के सबसे अधिक 60 लोग शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद संगठन के भीतर नाराजगी सामने आई है। प्रभावित पदाधिकारियों ने बिना नोटिस दिए कार्रवाई करने और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए निलंबन की जानकारी साझा की। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के 60, गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14 और हिमाचल प्रदेश के 13 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। निलंबित लोगों में पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक, अगला नोटिस जारी होने तक निलंबन लागू रहेगा।
पारिवारिक कारणों से रैली में नहीं हो सके थे शामिल
निलंबित पदाधिकारी रोहत रजोरिया ने बताया कि उनके साथी रवीश पाल सिंह के चाचा का निधन हो गया था। इसी वजह से वह रैली में शामिल नहीं हो सके। रजोरिया के अनुसार, इसकी सूचना संगठन को भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद बिना किसी नोटिस के निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
कुछ अन्य पदाधिकारियों ने भी रैली में शामिल नहीं हो पाने के पीछे बीमारी, पारिवारिक कार्यक्रम और शादी जैसे कारण बताए हैं। निलंबित पदाधिकारियों ने संगठन में पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि अब नेहा बोरा को अधिक तवज्जो दी जा रही है।
गडकरी ने कांग्रेस पर लगाए अराजकता फैलाने के आरोप
इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को नागपुर में भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार से निराश कांग्रेस देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। गडकरी ने कहा कि देश की जनता अब कांग्रेस पर भरोसा नहीं करेगी।
आपातकाल का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा
गडकरी ने अपने संबोधन में आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए थे। उस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लोगों को जेलों में बंद किया गया और कई लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग करने, भ्रामक प्रचार करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले करने से कांग्रेस को जनता का समर्थन वापस नहीं मिलेगा। गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस नेताओं, खासकर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीने थे, वही आज लोकतंत्र की रक्षा की बात कर रही है।



