NCP के विलय पर अनिल देशमुख का दो टूक जवाब, बोले- ‘विलय नहीं, हमारी पार्टी में आना है तो स्वागत है’

मुंबई: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के फिर से एक होने की चर्चाओं के बीच पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेता अनिल देशमुख ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सत्ताधारी एनसीपी का कोई नेता उनकी पार्टी में शामिल होना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा।
अनिल देशमुख का यह बयान सत्तारूढ़ एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि अजित पवार जीवित होते तो इसी साल फरवरी में दोनों गुटों का विलय हो गया होता।
शुक्रवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान देशमुख ने तटकरे के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने उन पर विरोधाभासी बातें करने का आरोप लगाया। देशमुख के मुताबिक, अजित पवार के जीवित रहते ही यह तय हो चुका था कि एनसीपी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस लेगी और दोनों गुट फिर एक साथ आएंगे।
हालांकि, दोनों दलों के एक होने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने दोहराया कि सत्ताधारी एनसीपी और विपक्षी एनसीपी (एसपी) के बीच विलय की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में शामिल होने के इच्छुक नेताओं का स्वागत है, लेकिन दोनों दलों का विलय नहीं होगा।
अजित पवार के निधन के बाद तटकरे के बयान पर उठाए सवाल
अनिल देशमुख ने सुनील तटकरे के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि अजित पवार के अचानक निधन के बाद तटकरे ने दावा किया था कि तत्कालीन एनसीपी अध्यक्ष ने दोनों गुटों के दोबारा एक होने को लेकर पार्टी के नेताओं से कोई चर्चा नहीं की थी।
देशमुख ने सवाल उठाया कि यदि पहले तटकरे कह चुके थे कि अजित पवार ने विलय को लेकर कोई जानकारी नहीं दी थी, तो अब वे यह दावा कैसे कर रहे हैं कि अजित पवार जीवित होते तो 12 फरवरी को दोनों गुट एक हो जाते?
28 जनवरी को विमान हादसे में हुआ था अजित पवार का निधन
गौरतलब है कि इसी साल 28 जनवरी को महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से ही एनसीपी के दोनों गुटों के राजनीतिक भविष्य और संभावित एकजुटता को लेकर चर्चाएं जारी हैं। इसी बीच अनिल देशमुख के ताजा बयान ने दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।



