मध्य प्रदेशराज्य

CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, वेतन बढ़ाने और नियमितीकरण पर बनेगी कमेटी

भोपाल: मध्य प्रदेश में तीन दिन से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद समाप्त हो गई है। राज्य मंत्री कृष्णा गौर के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास पर उनसे मुलाकात की। बातचीत के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया और काम पर लौटने लगे। कुछ इलाकों में सफाई व्यवस्था भी फिर से शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और नियमितीकरण से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। खबर के मुताबिक, कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ाकर 18 से 20 हजार रुपये तक किए जाने की संभावना है।

तीन दिन की हड़ताल से प्रभावित हुई सफाई और जलापूर्ति

अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के नेतृत्व में कर्मचारी चार प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। यूनियन की मांग थी कि उनका वेतन 10,500 रुपये बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। आंदोलन के चलते शहर की सड़कों पर कचरा जमा होने लगा था।

शुक्रवार को सफाई कर्मचारियों ने टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी थी। इससे कई क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति पैदा हो गई।

एक महीने में मांगों पर प्रक्रिया शुरू करेगी कमेटी

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, मुख्यमंत्री के सामने कर्मचारियों के नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांगें रखी गईं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों पर विचार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। कमेटी एक महीने के भीतर चार प्रमुख मांगों पर प्रक्रिया शुरू करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है और सरकार हर कर्मचारी के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी को साथ लेकर काम करेगी।

कमेटी के सामने रखे गए ये प्रमुख मुद्दे

कमेटी सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण और 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विनियमित करने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। इसके अलावा निर्धारित 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी नहीं करने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ाकर 18 से 19 हजार रुपये करने का मुद्दा भी उसके सामने होगा।

दिवंगत कर्मचारियों के पति या पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति देने और ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को विधिवत प्रस्ताव भेजने पर भी विचार किया जाएगा।

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