डायल-112 पर बड़ा एक्शन प्लान! अब 2 मिनट में नहीं रवाना हुई पुलिस तो भोपाल तक पहुंचेगा अलर्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश में आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को और अधिक तेज और जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी भी घटना की सूचना मिलने के बाद यदि डायल-112 का वाहन दो मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना नहीं होता है तो इसकी जानकारी सीधे जिले के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। नई व्यवस्था के तहत देरी होने पर भोपाल स्तर पर निगरानी के साथ संबंधित जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को तत्काल अलर्ट भेजा जाएगा।
पुलिस रेडियो मुख्यालय ने डायल-112 के संचालन तंत्र में यह बदलाव रिस्पांस टाइम को बेहतर बनाने और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से किया है।
दो मिनट में रवाना होना अनिवार्य
नई व्यवस्था के अनुसार फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) के पायलट को जैसे ही कोई इवेंट प्राप्त होगा, उसे सबसे पहले उस सूचना को स्वीकार करना होगा। इसके बाद उसे सिस्टम में यह दर्ज करना होगा कि वाहन घटनास्थल के लिए रवाना हो चुका है।
यदि सूचना मिलने के दो मिनट के भीतर यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जनरेट करेगा। इस अलर्ट में संबंधित वाहन का नंबर और थाना क्षेत्र की जानकारी भी शामिल होगी, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल स्थिति का पता चल सके।
अब एडिशनल एसपी को मिलेगी सीधी सूचना
पहले इस प्रकार के अलर्ट जिला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचते थे, लेकिन अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए इसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि इससे घटनाओं की निगरानी और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप से रिस्पांस टाइम कम करने में मदद मिलेगी और आम नागरिकों को तेजी से सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
9 महीने में 78 लाख लोगों ने मांगी मदद
डायल-112 के हालिया आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2025 से 26 मई 2026 तक करीब नौ महीनों में 78 लाख लोगों ने आपातकालीन सहायता के लिए कॉल की। इनमें से 21 लाख से अधिक मामलों में एफआरवी वाहनों को मौके पर भेजा गया।
इन घटनाओं में सबसे अधिक मामले साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से जुड़े रहे। आंकड़े बताते हैं कि डायल-112 प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा सेवाओं में शामिल हो चुकी है।
रिस्पांस टाइम बढ़ने की शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
पुलिस रेडियो मुख्यालय की निगरानी के दौरान लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई स्थानों पर एफआरवी वाहन समय पर रवाना नहीं हो रहे थे, जिसके कारण सहायता पहुंचने में देरी हो रही थी।
आंतरिक जांच में यह पाया गया कि कुछ मामलों में वाहन चालक या पायलट वाहन खड़ा कर अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाते थे। ऐसे में इवेंट मिलने के बाद भी मौके पर पहुंचने में अनावश्यक विलंब हो रहा था। इसी खामी को दूर करने के लिए सिस्टम में तकनीकी बदलाव लागू किया गया है।
आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है डायल-112 नेटवर्क
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए डायल-112 सेवा को नई तकनीक और संसाधनों से मजबूत किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उस दौरान पुलिस विभाग को 1200 नई महिंद्रा स्कॉर्पियो और बोलेरो वाहन उपलब्ध कराए थे।
इसी के साथ पारंपरिक डायल-100 सेवा को डायल-112 में परिवर्तित किया गया था, ताकि नागरिकों को एकीकृत और त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
तेज सहायता और बेहतर कानून व्यवस्था पर फोकस
सरकार और पुलिस मुख्यालय का दावा है कि नई तकनीकी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों तक कम समय में सहायता पहुंचाना और कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। अब दो मिनट की निगरानी प्रणाली लागू होने से डायल-112 की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।



