
सहरसा: बिहार के सहरसा और आसपास के जिलों के लोगों के हवाई सफर का इंतजार और लंबा हो सकता है। सहरसा एयरपोर्ट पर टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए जारी निविदा को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रद्द कर दिया है। खास बात यह है कि इस निविदा में चार कंपनियों ने बोली लगाई थी और प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद एजेंसी का चयन होने से पहले ही 14 अक्टूबर को टेंडर रद्द कर दिया गया। अथॉरिटी ने इसके पीछे प्रशासनिक कारण बताए हैं, लेकिन वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
चार कंपनियों ने लगाई थी बोली, फिर क्यों रद्द हुआ टेंडर?
सहरसा एयरपोर्ट के विकास की योजना दो चरणों में पूरी की जानी है। पहले चरण में टर्मिनल भवन, एटीसी टावर, अग्निशमन केंद्र और अन्य जरूरी इमारतों का निर्माण प्रस्तावित है। दूसरे चरण में रनवे के पुनर्निर्माण सहित अन्य कार्य कराए जाने हैं।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने पहले चरण के निर्माण के लिए 22 अप्रैल 2026 को निविदा जारी की थी। इसमें प्री-फैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर से टर्मिनल भवन और प्री-इंजीनियर्ड एटीसी टावर बनाने की योजना शामिल थी। निविदा 16 जून को खोली गई थी और 14 जुलाई तक इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन पिछले सप्ताह टेंडर रद्द किए जाने से परियोजना की रफ्तार पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इन चार कंपनियों ने पेश की थी अपनी बोली
टर्मिनल भवन और एटीसी टावर के निर्माण के लिए आयोजित निविदा में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इनमें आद्याराज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, आनंद बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, एमएचपीएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एससीसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन कंपनियों में से किसी एक को निर्माण कार्य सौंपे जाने की उम्मीद थी। हालांकि, एजेंसी का चयन होने से पहले ही पूरी निविदा रद्द कर दी गई। अब अथॉरिटी नए सिरे से टेंडर जारी करती है या आगे क्या प्रक्रिया अपनाती है, इस पर परियोजना की अगली दिशा निर्भर करेगी।
रनवे निर्माण के लिए दूसरा टेंडर, दो कंपनियों ने दिखाई रुचि
सहरसा एयरपोर्ट के उन्नयन के लिए सितंबर 2026 में दूसरा टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत रनवे के पुनर्निर्माण और अन्य नागरिक निर्माण कार्य कराए जाने हैं। इस निविदा में दो कंपनियों ने बोली लगाई है और इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि, टर्मिनल भवन और एटीसी टावर से जुड़ी पहली निविदा रद्द होने के बाद निर्माण कार्यों में देरी की आशंका बढ़ गई है। यदि इसके लिए दोबारा निविदा जारी की जाती है, तो चयन और निर्माण की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। ऐसे में सहरसा एयरपोर्ट से नियमित हवाई सेवा शुरू होने की समयसीमा को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
35.14 करोड़ रुपये की थी परियोजना, 15 महीने में पूरा होना था काम
सहरसा एयरपोर्ट के पहले चरण के निर्माण कार्य के लिए 35.14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की गई थी। इस परियोजना को 450 दिन यानी 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट पर हवाई सेवा संचालन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करना था।
योजना के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में 1,580 वर्ग मीटर क्षेत्र में दो मंजिला टर्मिनल भवन बनाया जाना था। इसके अलावा 165 वर्ग मीटर में एटीसी टावर और 451 वर्ग मीटर में अग्निशमन केंद्र का निर्माण प्रस्तावित था। इन संरचनाओं के साथ हवाई अड्डे पर अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जानी थीं।
1,000 मीटर लंबा होगा रनवे, छोटे विमानों के संचालन की तैयारी
सहरसा एयरपोर्ट को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के अनुकूल बनाने की योजना है। इसके तहत रनवे की लंबाई 1,000 मीटर और चौड़ाई 30 मीटर निर्धारित की गई है। रनवे के पुनर्निर्माण के साथ एप्रन, टैक्सीवे और अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित करने की योजना भी एयरपोर्ट के उन्नयन का हिस्सा है।
परियोजना पूरी होने पर सहरसा एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की उम्मीद है। लेकिन टर्मिनल भवन और एटीसी टावर के निर्माण का टेंडर रद्द होने से कामकाज की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सहरसा और आसपास के जिलों के लोगों को हवाई सेवा शुरू होने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।



