
UP के आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत! योगी सरकार बदलेगी पूरी व्यवस्था, भर्ती से भुगतान तक आएगी पारदर्शिता
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का फोकस कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के साथ विभागों को बेहतर और व्यवस्थित मानव संसाधन उपलब्ध कराने पर है।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आउटसोर्सिंग प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। साथ ही निगम की भूमिका को और मजबूत बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और एकरूप बनाने पर जोर दिया गया।
तकनीक आधारित होगी आउटसोर्सिंग प्रणाली
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरी प्रणाली को तकनीक आधारित बनाया जाए, ताकि पारदर्शिता बढ़े और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें जवाबदेही के साथ कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बन सके।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यूपीसीओएस की स्थापना विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों और मानदेय व्यवस्था में एकरूपता तथा पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से की गई थी। अब सरकार इसे और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
ऑनलाइन पोर्टल से होगी निगरानी और नियुक्ति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए विकसित किए जा रहे एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल को तय समय सीमा के भीतर तैयार किया जाए और इसे पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति, सत्यापन और निगरानी से जुड़ी प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाए। इससे पूरी व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी तथा कर्मचारियों और विभागों दोनों को इसका लाभ मिलेगा।
कर्मचारी हितों की सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्सिंग प्रणाली में सुधार का मूल उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और विभागों को सुव्यवस्थित मानव संसाधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि व्यवस्था को इस तरह विकसित किया जाए, जिससे कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद कार्य वातावरण मिल सके।



