हृदयनारायण दीक्षित: बोलने से मन नहीं भरता। लगातार बोलना हमारा व्यावहारिक संवैधानिक दायित्व है। विधानसभा का सदस्य हूं और अध्यक्ष…
Read More »दस्तक-विशेष
आरक्षण के मुद्दे पर एक बार जब ड्राफ्ट धारा 292 एवं 294 के अंतरगत मतदान हुआ तो उस में सात…
Read More »हृदयनारायण दीक्षित : कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिक् भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म…
Read More »हृदयनारायण दीक्षित : संसार धर्म क्षेत्र है। यह कथन शास्त्रीय है। संसार कर्मक्षेत्र है। पुरूषार्थ जरूरी है। यह निष्कर्ष वैदिक…
Read More »आज दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देश अंतरिक्ष में अपनी पैठ बनाने में जुटे हुए हैं। इसमें पहला…
Read More »विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक…
Read More »हृदयनारायण दीक्षित : श्रद्धा भाव है और श्राद्ध कर्म। श्रद्धा मन का प्रसाद है और प्रसाद आंतरिक पुलक। पतंजलि ने…
Read More »बोध आसान नहीं। शोध आसान है। शोध के लिए प्रमाण, अनुमान, पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा सिद्ध कथन और प्रयोग पर्याप्त हैं।…
Read More »हम सब कर्मशील प्राणी हैं। कर्म की प्रेरणा है कर्मफल प्राप्ति की इच्छा। कर्मफल प्राप्ति की अभिलाषा के कारण ही…
Read More »नई दिल्ली : एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशन ने बुधवार को हेलिफेक्स कनाडा में आयोजित “एसीआई वर्ल्ड कस्टमर एक्सिलेंस ग्लोबल सम्मिट” में…
Read More »स्तम्भ: अयोध्या पीछे छूट चुकी थी, जनशून्य क्षेत्र आरम्भ हो चुका था। कैकेयी इस सत्य को जानती थीं कि जब…
Read More »स्तम्भ: वे अपने महल के विशाल कक्ष में बेचैनी से चहल क़दमी कर रहे थे, मृत्यु के मुख पर खड़े…
Read More »स्तम्भ : कंस ने लगभग डाँटते हुए कहा- मुझे बहलाओ मत कृष्ण। मैं गोकुल की गोपी नहीं हूँ, जो तुम्हारे…
Read More »स्तम्भ : कृष्ण अपने हृदय की आत्मीयता को कंस पर उड़ेलते हुए बोले- मुक्त होने के लिए रिक्त होना पड़ता…
Read More »स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री…
Read More »स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस…
Read More »स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से…
Read More »अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना…
Read More »स्तम्भ : काम का ज्वर उतरते ही पवनरेखा की देह पर आरूढ़ उग्रसेन ने भी अपनी दृष्टि की कोर से…
Read More »अध्यात्म : संसार में हाथ, दो पैर वाले जीवों की भरमार है। सामान्यतया उन्हें ‘मनुष्य’ कहते है। लेकिन ‘मनुष्य’ ये…
Read More »स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य…
Read More »स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है…
Read More »स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक…
Read More »इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी…
Read More »भाव का केन्द्र हृदय है और ज्ञान का केन्द्र बुद्धि। बुद्धि का आधार स्मृति है। हम प्रत्यक्ष जगत का विवेचन…
Read More »दिल्ली : सत्ता में आते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत अधिकारियों तथा नेताओं के…
Read More »यूँ तो हमारे भारत देश के इतिहास में नाजाने कितने ही राजा आये और गए, लेकिन आज जिस राजा के…
Read More »संसद में अविश्वास प्रस्ताव की जीत और उत्तर प्रदेश में ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी में 60000 करोड़ के निवेश से लबरेज…
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