दस्तक-विशेष

    बुद्धि और भाव का संगम है प्रयाग तीर्थराज

    तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व भी खोजे…

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    इस बार होंगे अक्षय वट और सरस्वती कूप के दर्शन

    प्रयागराज में स्थित अकबर के किले में एक ऐसा वट है जो कभी यमुना नदी के किनारे हुआ करता था…

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    सभी को सिद्धी प्रदान करने वाला कुम्भ

    एक बार फिर तीर्थराज प्रयाग में आस्था की डुबकी लगने वाली है। आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलनसारिता के…

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    भाजपा का विजय रथ रोकने की तैयारी

    कहा जाता है कि देश में सरकार बनाने का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाता है। यही वजह है कि…

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    ‘हनक’ छीन ले गए राज्यों के चुनाव

    एक वह भी दौर था जब ‘वे’ दिन को रात कहते थे तब भी सभी उनकी हां में हां मिला…

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    प्रियंका गांधी : आखिर आ ही गईं राजनीति में, बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कार्यकर्ता

    नई दिल्ली : प्रियंका गाँधी को कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाया गया है। प्रियंका गांधी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति…

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    ‘मोदी का मास्टर स्ट्रोक’

    माफ  कीजिएगा, वन डे क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों (अंतिम के दस ओवर) में ही लगता है। ….और चिन्ता मत…

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    राम मंदिर बनाम राजनीति

    फिरोज बख्त अहमद : कुछ समय पूर्व अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद्, शिवसेना, भाजपा, धर्मसंसद आदि के कार्यकर्ता एकत्र हुए…

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    आज भी भारत में साम्प्रदायिकता का जहर समाप्त नहीं हुआ है

    फिरोज बख्त अहमद : पढ़ने व सुनने में एवं देखने में आ रहा कि धर्म की तिजारत करने वाली राजनीति…

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    …आखिर विकल्प क्या था

    नई दिल्ली : आलोक वर्मा की सीबीआई निदेशक पद पर बहाली के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद साफ था…

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    ‘बड़ा रहस्यपूर्ण है ‘स्वयं’, सोचता हूं कि क्या मेरा व्यक्तित्व दो ‘स्वयं’ से बना है, एक देखता है, दूसरा दिखाई पड़ता है’

    शतपथ ब्राह्मण में प्रश्न है – “मनुष्य को कौन जानता है?” मनुष्य को दूसरा मनुष्य नहीं जान सकता। प्रत्येक मनुष्य…

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    वायु प्राण है, प्राण नहीं तो जीवन नहीं

    जीवन को भरपूर देखते हुए वायु को भी देखा जा सकता है। हम आधुनिक लोगों ने वायु को दूषित किया…

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    ‘प्रकृति की संगति में स्वयं का पुनर्सृजन ही वास्तविक अभिव्यक्ति’

    हृदयनारायण दीक्षित: बोलने से मन नहीं भरता। लगातार बोलना हमारा व्यावहारिक संवैधानिक दायित्व है। विधानसभा का सदस्य हूं और अध्यक्ष…

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    मौलाना आज़ाद और हिन्दुत्व

    आरक्षण के मुद्दे पर एक बार जब ड्राफ्ट धारा 292 एवं 294 के अंतरगत मतदान हुआ तो उस में सात…

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    स्वस्थ, मस्त जीवन मधुअभिलाषा है, रोगरहित दीर्घ जीवन के अभिलाषी थे हमारे पूर्वज

    हृदयनारायण दीक्षित : कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिक् भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म…

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    सौन्दर्यबोध से भरेपूरे हैं वैदिक पूर्वज

    हृदयनारायण दीक्षित : संसार धर्म क्षेत्र है। यह कथन शास्त्रीय है। संसार कर्मक्षेत्र है। पुरूषार्थ जरूरी है। यह निष्कर्ष वैदिक…

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    अंतरिक्ष का कचरा बन चुके हैं 95 फीसदी मानवनिर्मित उपग्रह, अमेरिका है सबसे आगे

    आज दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देश अंतरिक्ष में अपनी पैठ बनाने में जुटे हुए हैं। इसमें पहला…

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    भारत शक्ति उपासना में आनंदमगन है

    विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक…

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    प्रत्यक्ष मानवीय गुण है पितरों का आदर

    हृदयनारायण दीक्षित : श्रद्धा भाव है और श्राद्ध कर्म। श्रद्धा मन का प्रसाद है और प्रसाद आंतरिक पुलक। पतंजलि ने…

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    राष्ट्रीय अस्मिता का सामूहिक सत्य है ‘भारत बोध’

    बोध आसान नहीं। शोध आसान है। शोध के लिए प्रमाण, अनुमान, पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा सिद्ध कथन और प्रयोग पर्याप्त हैं।…

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    क्या कर्मफल की इच्छा दोषपूर्ण अभिलाषा है, अनासक्त कर्म ही क्यों श्रेष्ठ है?

    हम सब कर्मशील प्राणी हैं। कर्म की प्रेरणा है कर्मफल प्राप्ति की इच्छा। कर्मफल प्राप्ति की अभिलाषा के कारण ही…

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    देश के 11 हवाई अड्डों को मिला पुरस्कार, दिल्ली और मुंबई को दुनिया का सबसे बेहतरीन हवाई अड्डा घोषित किया गया है।जाने यहां

    नई दिल्ली : एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशन ने बुधवार को हेलिफेक्स कनाडा में आयोजित “एसीआई वर्ल्ड कस्टमर एक्सिलेंस ग्लोबल सम्मिट” में…

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    रामराज्य : आशुतोष राणा की कलम से..{.भाग_४}

    स्तम्भ: अयोध्या पीछे छूट चुकी थी, जनशून्य क्षेत्र आरम्भ हो चुका था। कैकेयी इस सत्य को जानती थीं कि जब…

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    वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग_१}

    स्तम्भ: वे अपने महल के विशाल कक्ष में बेचैनी से चहल क़दमी कर रहे थे, मृत्यु के मुख पर खड़े…

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    वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_२]

    स्तम्भ : कंस ने लगभग डाँटते हुए कहा- मुझे बहलाओ मत कृष्ण। मैं गोकुल की गोपी नहीं हूँ, जो तुम्हारे…

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    वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग_३}

    स्तम्भ : कृष्ण अपने हृदय की आत्मीयता को कंस पर उड़ेलते हुए बोले- मुक्त होने के लिए रिक्त होना पड़ता…

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    वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से… {भाग_४}

    स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री…

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    वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से स्तम्भ {भाग_५]

    स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस…

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