स्तम्भ
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अजर और अमर है भारतीय जनतंत्र
हृदयनारायण दीक्षित : भारतीय जनतंत्र अजर-अमर है। यह भारतीय समाज की मूल प्रकृति है। राष्ट्रजीवन का स्वाभाविक प्रवाह और भारत…
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किस प्रकार से पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए
फिरोज बख्त अहमद : देश के 44 जवानों का बलिदान, इस बार व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हालांकि यह पहला बलिदान…
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हर व्यक्ति का स्वाद अलग, लेकिन मधु पदार्थ सभी को करता है आकर्षित
हृदयनारायण दीक्षित : स्वाद दिखाई नहीं पड़ता। सबके अपने स्वाद बोध हैं। इसलिए सबका स्वादिष्ट भी अलग-अलग है। लेकिन मीठा सबको…
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सतत कर्म का कोई विकल्प नहीं
हृदयनारायण दीक्षित: प्रकृति की सभी शक्तियां गतिशील हैं। हम पृथ्वी से हैं, पृथ्वी में हैं। पृथ्वी माता है। पृथ्वी सतत् गतिशील…
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सब जीना चाहते हैं, लेकिन मृत्यु निश्चित है
हृदयनारायण दीक्षित : जीने की इच्छा में मृत्यु का भय अंतनिर्हित है। जितनी गहरी जीवेष्णा उतना ही गहरा असुरक्षा का…
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अमृत प्यास का कुम्भ
हृदयनारायण दीक्षित : अमृत प्राचीन प्यास है। कोई मरना नहीं चाहता लेकिन सभी जीव मरते हैं। मृत्यु को शाश्वत सत्य…
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कौन है ऊपर ? पार्टी या देश !
के. विक्रम राव अंततः यू. पी. का एक खाकीधारी ही मूल में निकला, जिसने भारत के सत्तरसाला संघीय ढाँचे को…
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जब जार्ज, अटल, बहुगुणा चूके
के. विक्रम राव स्तम्भ : यदि उस समय तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव की बात मान ली…
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गोड्से एक आकलन
के. विक्रम राव बापू (महात्मा गांधी) की पुण्यतिथि पर नाथूराम विनायक गोड्से की भी याद आती है| जैसे ग्रहण की…
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प्रियंका करिश्माई होंगी !
के. विक्रम राव अपने सारे जीवन में प्रियंका केवल दर्शक दीर्घा से ही संसद की कार्यवाही देखती रहीं| इतना ही…
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स्वयं को देखो स्वयं के द्वारा
स्वयं को जानना कठिन है। असंभव तो नहीं है लेकिन है बड़ा जटिल। जानने की गतिविधि में कम से कम दो…
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बुद्धि और भाव का संगम है प्रयाग तीर्थराज
तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व भी खोजे…
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राम मंदिर बनाम राजनीति
फिरोज बख्त अहमद : कुछ समय पूर्व अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद्, शिवसेना, भाजपा, धर्मसंसद आदि के कार्यकर्ता एकत्र हुए…
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आज भी भारत में साम्प्रदायिकता का जहर समाप्त नहीं हुआ है
फिरोज बख्त अहमद : पढ़ने व सुनने में एवं देखने में आ रहा कि धर्म की तिजारत करने वाली राजनीति…
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…आखिर विकल्प क्या था
नई दिल्ली : आलोक वर्मा की सीबीआई निदेशक पद पर बहाली के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद साफ था…
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प्रकृति प्रेमी है वैदिक समाज, वह सूर्य को नमस्कार करता है, उनसे बुद्धि मांगता है
ऋग्वेद से लेकर अथर्ववेद तक गायों की प्रशंसा है। महाकाव्य और पुराण गोयश से भरे पूरे हैं। वेदों में गाय…
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‘बड़ा रहस्यपूर्ण है ‘स्वयं’, सोचता हूं कि क्या मेरा व्यक्तित्व दो ‘स्वयं’ से बना है, एक देखता है, दूसरा दिखाई पड़ता है’
शतपथ ब्राह्मण में प्रश्न है – “मनुष्य को कौन जानता है?” मनुष्य को दूसरा मनुष्य नहीं जान सकता। प्रत्येक मनुष्य…
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वायु प्राण है, प्राण नहीं तो जीवन नहीं
जीवन को भरपूर देखते हुए वायु को भी देखा जा सकता है। हम आधुनिक लोगों ने वायु को दूषित किया…
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परम सत्ता रस है, शब्द जीवन को मधुरस से भर दे, तब कविता
हृदयनारायण दीक्षित : अस्तित्व एक इकाई है। भारतीय दर्शन में इस अनुभूति को अद्वैत कहते हैं। अस्तित्व में दो नहीं…
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निष्प्राण मूर्ति में प्राण भरता है जल, पवित्रता का भाव तीर्थस्थल
हृदयनारायण दीक्षित : तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के…
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तर्क, जिज्ञासा और दर्शन की शुरुआत ऋग्वैदिक काल से भी प्राचीन
हिन्दुओं का कोई सर्वमान्य आस्था ग्रंथ नहीं और न ही सर्वमान्य देवता। हरेक हिन्दू की अपनी इच्छा। कोई अग्नि उपासक…
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‘प्रकृति की संगति में स्वयं का पुनर्सृजन ही वास्तविक अभिव्यक्ति’
हृदयनारायण दीक्षित: बोलने से मन नहीं भरता। लगातार बोलना हमारा व्यावहारिक संवैधानिक दायित्व है। विधानसभा का सदस्य हूं और अध्यक्ष…
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‘दुख का कारण है अज्ञानता, ज्ञान से मिलता है आनंद’
हृदयनारायण दीक्षित : गर्भ सभी प्राणियों का उद्गम है। माँ गर्भ धारण करती है। पिता का तेज गर्भ में माँ…
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मौलाना आज़ाद और हिन्दुत्व
आरक्षण के मुद्दे पर एक बार जब ड्राफ्ट धारा 292 एवं 294 के अंतरगत मतदान हुआ तो उस में सात…
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स्वस्थ, मस्त जीवन मधुअभिलाषा है, रोगरहित दीर्घ जीवन के अभिलाषी थे हमारे पूर्वज
हृदयनारायण दीक्षित : कालद्रव्य बदल गया है। समय भी प्रदूषण का शिकार है। दिक् भी स्वस्थ नहीं। मन और आत्म…
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सौन्दर्यबोध से भरेपूरे हैं वैदिक पूर्वज
हृदयनारायण दीक्षित : संसार धर्म क्षेत्र है। यह कथन शास्त्रीय है। संसार कर्मक्षेत्र है। पुरूषार्थ जरूरी है। यह निष्कर्ष वैदिक…
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आखिर रूप, रस, गंध, स्पर्श और स्वाद के आनंद का केन्द्र क्या है?
स्वयं के भीतर बैठकर अन्तःकरण की गति और विधि देखना ही अध्यात्म है हृदयनारायण दीक्षित : संसार प्रत्यक्ष है। दिखाई…
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अहंकार रूपी रावण को अपने अंदर मारने के लिए राम रूपी ईश्वरीय गुण विकसित करना है
दशहरा पर्व हर्ष और उल्लास का त्योहार है डा. जगदीश गांधी : दशहरा हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है।…
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