स्तम्भ
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ऋग्वेद विश्व मानवता का प्रथम शब्द साक्ष्य है
हृदयनारायण दीक्षित : ऋग्वेद दुनिया का सबसे प्राचीन काव्य संकलन है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने भी ऋग्वेद को प्राचीनतम अंतर्राष्ट्रीय…
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उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के पक्षधर थे वैदिक ऋषि
हृदयनारायण दीक्षित : चिकित्सा विज्ञान की परम्परा प्राचीन है। उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन भारतीय मनीषियों की प्राचीन इच्छा रही…
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किसी कुत्सित धारणा के आधार पर सत्य से भिन्न बोलना समाज विरोधी है
‘सत्य का आग्रह’ वैदिक काल से प्राचीन है। हृदयनारायण दीक्षित : सत्याग्रह सत्य का आग्रह है। भारत में सत्य के…
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क्या पार्टियों के घोषणा पत्र झूठ का पुलिंदा होते हैं?
फिरोज बख्त अहमद : अभी हाल ही में एक व्हाट्सएप संदेश में विश्व हिंदू परिषद के धुरंधर नेता डा. प्रवीण…
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सफलता का मूल केन्द्र इच्छा या अभिलाषा है और अभिलाषाएं अनंत हैं
हृदयनारायण दीक्षित : सफलता प्रसन्न्ता देती है और असफलता दुख। मोटे तौर पर सफलता का अर्थ इच्छानुसार कर्मफल की प्राप्ति…
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इस मुस्लिम लेखक को आखिर मोदी क्यों पसंद है?
फिरोज बख्त अहमद : लेखक पिछले लगभग 5 दशकों से विभिन्न सरकारों को देखता चला आया है, जिनमें प्रधानमंत्री के…
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प्रकृति से शांतिप्रिय हैं भारतवासी, शांतिप्रियता का अनुचित लाभ उठाते थे अंगे्रज
हृदयनारायण दीक्षित : भारतवासी प्रकृति से शांतिप्रिय हैं। इसके कारण उनकी उदात्त सभ्यता में खोजे जाने चाहिए। शांतिप्रियता उत्कृष्ट जीवन…
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मोदी को खोने का समय हरगिज नहीं है भारत के लिए, हर आजमाइश से खरे होकर निकले हैं मोदी
फिरोज बख्त अहमद : भारत में एक बार फिर चुनाव का बिगुल बज चुका है। आजतक जितने भी चुनाव हुए…
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आधी आबादी को क्यों न मिले पूरी आजादी?
आशा त्रिपाठी : आचार्य कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में कहा था कि महिलाओं की सुरक्षा ऐसी होनी चाहिए कि महिला खुद…
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पाकिस्तान प्राकृतिक राष्ट्र नहीं है, मजहब के आधार पर भारत विभाजन से यह एक मुल्क बना
हृदयनारायण दीक्षित : भारत पाक के मध्य युद्ध की स्थिति है। पाकिस्तान की तरफ से मुसलसल युद्ध है। आमने सामने…
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पुलवामा हमले के बाद राष्ट्रीय एकता सूत्र में बंध गया देश
हृदयनारायण दीक्षित : भारत का स्वभाव राष्ट्रभाव है। कश्मीर पुलवामा की घटना के बाद यही राष्ट्रभाव चारो ओर प्रकट हो…
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अजर और अमर है भारतीय जनतंत्र
हृदयनारायण दीक्षित : भारतीय जनतंत्र अजर-अमर है। यह भारतीय समाज की मूल प्रकृति है। राष्ट्रजीवन का स्वाभाविक प्रवाह और भारत…
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किस प्रकार से पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए
फिरोज बख्त अहमद : देश के 44 जवानों का बलिदान, इस बार व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हालांकि यह पहला बलिदान…
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हर व्यक्ति का स्वाद अलग, लेकिन मधु पदार्थ सभी को करता है आकर्षित
हृदयनारायण दीक्षित : स्वाद दिखाई नहीं पड़ता। सबके अपने स्वाद बोध हैं। इसलिए सबका स्वादिष्ट भी अलग-अलग है। लेकिन मीठा सबको…
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सतत कर्म का कोई विकल्प नहीं
हृदयनारायण दीक्षित: प्रकृति की सभी शक्तियां गतिशील हैं। हम पृथ्वी से हैं, पृथ्वी में हैं। पृथ्वी माता है। पृथ्वी सतत् गतिशील…
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सब जीना चाहते हैं, लेकिन मृत्यु निश्चित है
हृदयनारायण दीक्षित : जीने की इच्छा में मृत्यु का भय अंतनिर्हित है। जितनी गहरी जीवेष्णा उतना ही गहरा असुरक्षा का…
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अमृत प्यास का कुम्भ
हृदयनारायण दीक्षित : अमृत प्राचीन प्यास है। कोई मरना नहीं चाहता लेकिन सभी जीव मरते हैं। मृत्यु को शाश्वत सत्य…
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कौन है ऊपर ? पार्टी या देश !
के. विक्रम राव अंततः यू. पी. का एक खाकीधारी ही मूल में निकला, जिसने भारत के सत्तरसाला संघीय ढाँचे को…
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जब जार्ज, अटल, बहुगुणा चूके
के. विक्रम राव स्तम्भ : यदि उस समय तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव की बात मान ली…
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गोड्से एक आकलन
के. विक्रम राव बापू (महात्मा गांधी) की पुण्यतिथि पर नाथूराम विनायक गोड्से की भी याद आती है| जैसे ग्रहण की…
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प्रियंका करिश्माई होंगी !
के. विक्रम राव अपने सारे जीवन में प्रियंका केवल दर्शक दीर्घा से ही संसद की कार्यवाही देखती रहीं| इतना ही…
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स्वयं को देखो स्वयं के द्वारा
स्वयं को जानना कठिन है। असंभव तो नहीं है लेकिन है बड़ा जटिल। जानने की गतिविधि में कम से कम दो…
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बुद्धि और भाव का संगम है प्रयाग तीर्थराज
तीर्थ भारत की आस्था है। लेकिन भौतिकवादी विवेचकों के लिए आश्चर्य हैं। वैसे इनमें आधुनिक विज्ञान के तत्व भी खोजे…
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राम मंदिर बनाम राजनीति
फिरोज बख्त अहमद : कुछ समय पूर्व अयोध्या में विश्व हिन्दू परिषद्, शिवसेना, भाजपा, धर्मसंसद आदि के कार्यकर्ता एकत्र हुए…
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आज भी भारत में साम्प्रदायिकता का जहर समाप्त नहीं हुआ है
फिरोज बख्त अहमद : पढ़ने व सुनने में एवं देखने में आ रहा कि धर्म की तिजारत करने वाली राजनीति…
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…आखिर विकल्प क्या था
नई दिल्ली : आलोक वर्मा की सीबीआई निदेशक पद पर बहाली के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद साफ था…
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प्रकृति प्रेमी है वैदिक समाज, वह सूर्य को नमस्कार करता है, उनसे बुद्धि मांगता है
ऋग्वेद से लेकर अथर्ववेद तक गायों की प्रशंसा है। महाकाव्य और पुराण गोयश से भरे पूरे हैं। वेदों में गाय…
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‘बड़ा रहस्यपूर्ण है ‘स्वयं’, सोचता हूं कि क्या मेरा व्यक्तित्व दो ‘स्वयं’ से बना है, एक देखता है, दूसरा दिखाई पड़ता है’
शतपथ ब्राह्मण में प्रश्न है – “मनुष्य को कौन जानता है?” मनुष्य को दूसरा मनुष्य नहीं जान सकता। प्रत्येक मनुष्य…
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