स्तम्भ
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अटल बिहारी वाजपेयी होने का मतलब
लखनऊ : अटल बिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह…
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स्वतंत्र, स्वभाव, स्वराज और स्वाभिमान
‘स्वतंत्र’ का अर्थ गहरा है। स्व का अर्थ सुस्पष्ट है। स्व यानी मैं। मेरा अन्तःक्षेत्र। हमारी अपनी अनुभूति। प्रत्येक व्यक्ति…
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निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें : डाॅ. जगदीश गाँधी
नया शैक्षिक सत्र चरित्र निर्माण का वर्ष हो बच्चों को भौतिक के साथ ही सामाजिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा भी दें…
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‘हम भारत के लोग’ : हृदयनारायण दीक्षित
‘हमारे पूर्वजों ने धरती को माता और आकाश को पिता बताया’ ‘हम भारत के लोग’ हैं। यही हमारा मूल परिचय…
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अंधविश्वासी नहीं है भारतीय चिंतन
‘दर्शन’ का मूल उद्देश्य संसार को समझना और विश्व को आनंद से भरना है संसार हमारा आश्रय है। हम संसार…
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हम लाये हैं तूफान से किश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के!
लखनऊ : भारत के लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को अपने…
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एक हाथ में कुरान हो, एक में कम्प्यूटर : नरेंद्र मोदी
मोदी सरकार को आज चार साल हो चुके हैं और पांचवें में थोड़ा ही समय रहता है। विपक्ष के बहुत…
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भारत की संस्कृति को सामाजिक संस्कृति कहते हैं : हृदयनारायण दीक्षित
दर्शन और विज्ञान का जन्म जिज्ञासा से हुआ। ऐसी जिज्ञासा ऋग्वेद में है। ऋग्वेद का रचनाकाल प्राचीन यूनानी दर्शन से…
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देश में करोड़ों वृद्ध परिजनों से पीड़ित : हृदयनारायण दीक्षित
जीवन की सांझ आ रही है। श्रम गीत मद्धिम हो रहे हैं। गहन विश्राम की तैयारी है, लेकिन अपने परिजन…
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भारतीय दर्शन के मूल स्रोत हैं उपनिषद्
उपनिषद् पूर्वाग्रह मुक्त हैं। इनमें पहले से बने बनाए विचारों का गहन विवेचन है। अंधविश्वासी कर्मकाण्ड का विरोध है। ये…
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व्यथित है पृथ्वी : हृदयनारायण दीक्षित
पृथ्वी व्यथित है। इसके अंगभूत जल, वायु, वनस्पति और सभी प्राणी आधुनिक जीवनशैली के हमले के शिकार हैं। पृथ्वी असाधारण…
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अभिशाप बनते जा रहे हैं सोशल मीडिया पर प्रचलित अफवाह
पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया तेजी से पूरे देश में क्रांति की तरह फैल रहा है,सुदूर प्रान्तों में…
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भगवान और भाईसाहब
आशुतोष राणा वे पूरे संसार के लिए आदरणीय होना चाहते थे किंतु ये बेहद मुश्किल काम था, तो भाईसाहब ने…
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सोशल मीडिया में सत्य, शिव और सुंदर
अभिव्यक्ति हरेक व्यक्ति की स्वाभाविक अभिलाषा है। हम स्वयं को भिन्न-भिन्न आयामों में प्रकट करते हैं। अपने बाल काढ़ने…
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मातृभूमि की तरफ़ वापसी का अब प्रश्न ही नहीं उठता
आदरणीया उषा वर्मा जी ब्रिटेन में बसी भारतीय मूल की जानी-मानी साहित्यकार और प्रतिष्ठित भाषा-साहित्य की शिक्षिका हैं। भारत में…
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‘भारत पर आर्यों का आक्रमण महाझूठ’
भारतीय समाज हजारों वर्ष पहले से तर्कशील रहा है। दुनिया के अन्य आस्तिक समुदायों में ईश्वर अतक्र्य आस्था है लेकिन…
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ज्ञान, योग, ध्यान ही परिपूर्ण विज्ञान
हृदयनारायण दीक्षित प्राचीन भारतीय दर्शन में बुद्धि की भूमिका है और बुद्धि भौतिक है। आत्मा अदृश्य है। उपनिषदों और गीता…
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संतजी के तीन बंदर
आशुतोष राणा तीन बंदर थे, बेहद उत्पाती..उनके तीन अलग-अलग दल थे। एक दल सिर्फ बुरा बोलता था, दूसरा दल सिर्फ…
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साम, दाम और दंड में फंसा लोकतंत्र
कर्नाटक से निकला संदेश पूरी राजनीति को बदबूदार बना दिया है। राज्यपाल के विवेक का विवेक के विशेषाधिकार भी मजाक…
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धर्म बातो का विषय नही है- वह तो प्रत्यक्ष अनुभूति का विषय हैं
प्रत्येक धर्म विश्वास पर बल देता है। धर्म पर ऑख बंद कर विश्वास करने की परंपरा हमने विरासत मे…
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‘आत्मा’ : भारतीय चिंतन का निराला तत्व
धर्म सांसारिक आचार संहिता है। देशकाल के अनुसार परिवर्तनीय है। भूत, भविष्य मनुष्य मन के गढ़े विचार हैं। गतिशील संसार…
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आशुतोष राणा की कलम से…मौन मुस्कान की मार
भाईसाहब में ग़ज़ब की मोहिनी थी। आप उनकी पीठ के पीछे भले ही कितना कुछ कहते रहें लेकिन उनके सामने…
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बड़ा प्रश्न, आखिर आत्मज्ञान था क्या?
कर्म इच्छा प्रेरित होते हैं। हम सब के भीतर अनेक अभिलाषाएं हैं। वे कर्म के लिए प्रेरित करती हैं। हम…
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हिन्दी के शत्रु : सत्ता, सम्पत्ति एवं सँस्थाएं : प्रभाकर माचवे
हिन्दी विरोध वस्तुत: भाषा और साहित्य के कारण से नहीं, परन्तु आर्थिक-सामाजिक-राजनैतिक कारणों से होता है। पूर्वांचल में, असम में…
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भारत, चीन की दोस्ती का नया चेहरा
नई दिल्ली : भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा इस ओर इशारा कर रही है कि फिर से दो…
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‘प्रारम्भ से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त था भारत का समाज’
ज्ञान अतृप्ति का अपना आनंद है। उपनिषद् साहित्य में इसीलिए प्रश्न और प्रतिप्रश्न हैं। प्रश्नों की इसी परंपरा के कारण…
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संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा महिमा का संरक्षण संवर्द्धन ही डॉ. आम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि : हृदयनारायण दीक्षित
इतिहास प्रायः अपनी राह चलता है लेकिन विचार और संकल्प से समृद्ध महानुभाव इतिहास की गति में हस्तक्षेप भी करते…
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कितना उचित है मीसा बंदी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पेंशन देना ?
चंडीगढ़ से जग मोहन ठाकन चंडीगढ़ : क्या राजनैतिक उद्देश्यों के लिए यानि सत्ता प्राप्ति के लिए एक राजनैतिक पार्टी…
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