स्तम्भ
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बड़ा प्रश्न, आखिर आत्मज्ञान था क्या?
कर्म इच्छा प्रेरित होते हैं। हम सब के भीतर अनेक अभिलाषाएं हैं। वे कर्म के लिए प्रेरित करती हैं। हम…
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हिन्दी के शत्रु : सत्ता, सम्पत्ति एवं सँस्थाएं : प्रभाकर माचवे
हिन्दी विरोध वस्तुत: भाषा और साहित्य के कारण से नहीं, परन्तु आर्थिक-सामाजिक-राजनैतिक कारणों से होता है। पूर्वांचल में, असम में…
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भारत, चीन की दोस्ती का नया चेहरा
नई दिल्ली : भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा इस ओर इशारा कर रही है कि फिर से दो…
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‘प्रारम्भ से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त था भारत का समाज’
ज्ञान अतृप्ति का अपना आनंद है। उपनिषद् साहित्य में इसीलिए प्रश्न और प्रतिप्रश्न हैं। प्रश्नों की इसी परंपरा के कारण…
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संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा महिमा का संरक्षण संवर्द्धन ही डॉ. आम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि : हृदयनारायण दीक्षित
इतिहास प्रायः अपनी राह चलता है लेकिन विचार और संकल्प से समृद्ध महानुभाव इतिहास की गति में हस्तक्षेप भी करते…
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कितना उचित है मीसा बंदी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पेंशन देना ?
चंडीगढ़ से जग मोहन ठाकन चंडीगढ़ : क्या राजनैतिक उद्देश्यों के लिए यानि सत्ता प्राप्ति के लिए एक राजनैतिक पार्टी…
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जीवन को मुग्ध करती है रूप, रस, गंध और ध्वनि
अस्तित्व पूर्ण है। इसका प्रकट भाग पूर्ण है और अप्रकट भी। प्रकृति इसकी पूर्ण अभिव्यक्ति है। इसलिए पूर्णता का आस्वाद…
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संसार को मनोरम बनाने का प्रचीन ज्ञान अभिलेख है ‘ऋग्वेद’
प्रकृति सुसंगत व्यवस्था है। यह अपनी अव्यवस्था को भी अल्पकाल में पुनर्व्यवस्थित करती है। प्रकृति की गति की एक लय…
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अल्पकाल में ही विदा हो जाती है होली : हृदयनारायण दीक्षित
होली आई। गई। होली प्रकृति का सौन्दर्य है। साधारण नहीं। अति साधारण। तब प्रकृति अपनी पूरी आभा से खिलती है।…
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आरएसएस की अविराम एवं भाव यात्रा का ध्येय पथ
पुस्तक समीक्षा ध्येय पथ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नौ दशक लोकेन्द्र सिंह जनसंचार माध्यमों में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के…
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धन की बात
आज ‘धन’ आया था मेरे पास। मैं उसको देखकर प्रसन्न हो गया, दुआ, सलाम के बाद मैंने उससे पूछा कि…
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टॉयलेट- एक मिशन कथा
“दरवाजा बंद करो भई, दरवाजा बंद. दरवाजा बंद करो, बीमारी बंद…” अमिताभ बच्चन अपने निराले अंदाज़ में गाते हैं। गाते…
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गांधी का झाडू
मन की सफाई जरूरी, वहां फैला हुअा है गंदगी का साम्राज्य सफाई की बात इन दिनों इतनी जोर-जोर से देश…
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गंधी वृक्ष
आशुतोष राणा की कलम से… भाईसाहब क़स्बे के सबसे विशाल छायादार दरख़्त को जड़ से उखाड़ फेंकने के भीम कार्य…
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नहीं, विपक्ष का अंत नहीं होगा
सन 2019 के चुनाव तक भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के प्रयासों को लगातार झटके लग रहे हैं। उधर, नरेंद्र…
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उत्कृष्ट जीवन मूल्य ही नहीं, मनुष्य की स्वाभाविक प्यास भी है स्वतंत्रता
सजग होकर ही उड़ना हमेशा होता है आनंददायी मनुष्य स्वेच्छा से जन्म नहीं लेता। मनुष्य का जन्म तमाम ज्ञात और…
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आपातकाल : आगे की कथा
आपातकाल। स्वातंत्र्योत्तर भारतीय इतिहास का संक्रमण काल। एक निरंकुश सत्तालोलुप शासक द्वारा लोकतंत्र पर कुठाराघात और अधिनायकवादी व्यवस्था थोपने का…
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‘विश्पाद गुधौलिया’
आशुतोष राणा की कलम से… उन्होंने अपने खेत पर अंगद का मंदिर बनाया हुआ था। ये पूरे संसार में एक…
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कोच अौर कप्तान की लक्ष्मण-रेखा!
वैसे तो खेल अौर राजनीति में कोई सीधा रिश्ता होता नहीं है या कहूं कि होना नहीं चाहिए लेकिन हुअा…
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समान नागरिक संहिता बनाने से पहले भारत की विशिष्टता पहचानिए
-डॉ़ रहीस सिंह आजकल तीन तलाक (ट्रिपल तलाक) के जरिए समान नागरिक संहिता पर पहुंचने सम्बंधी एक भिन्न माहौल बनता…
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लामचंद की लालबत्ती
माता पिता ने उनका नाम रामचंद्र रखा था। किंतु मेट्रिक की परीक्षा देने से ठीक पहले, वे एक शपथपत्र देकर…
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ब्राण्ड-मोदी की प्रचण्ड विजय में खतरे के संकेत भी
नवीन जोशी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचण्ड जीत बताती है कि नरेंद्र मोदी का जादू जनता के…
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बीसीपी उर्फ़ भग्गू पटेल
आशुतोष राणा की कलम से (अपने जीवंत और प्रभावशाली अभिनय के बलबूते आशुतोष राणा ने सिनेजगत में जो ख्याति अर्जित…
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बच्चे का धर्म
सुभाष गाताडे अपनी सन्तान को क्या माता पिता के नाम जुड़ी जाति तथा धर्म की पहचान के संकेतकों से नत्थी…
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भोजपुरी का दुख
मृत्युंजय पाण्डेय बहुत प्रसिद्ध कहावत है ‘घर को आग लगी, घर के चिराग से ही।’ आज भोजपुरी के साथ भी…
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••राम रवा लपटा महाराज••
वे लोगों से अभिवादन में केवल राम राम कहते थे, खाने में उन्हें सिर्फ़ रवा का हलवा, और बेसन का…
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अपना-अपना रंग
बलिहारी हो रंगों की सर्वत्र व्याप्त शून्यता से सिरजनहार अकुला उठे। अकुलाहट कौतूहल में तब्दील हो गई। कल्पना ने पहली…
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महिला लेखन की चुनौतियां
8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष लेखन तो किसी के लिए भी चुनौती ही होता है चाहे वह पुरुष…
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