अनिल अंबानी के करीबी पूर्व अधिकारी पर ED का शिकंजा, मुंबई से गिरफ्तारी के बाद दिल्ली लाया जा रहा मामला

मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय ने रिलायंस समूह से जुड़े एक बड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति अनिल अंबानी के करीबी माने जाने वाले सतीश सेठ को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है। अब उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है।
ईडी ने इसी मामले में समूह के एक अन्य पूर्व अधिकारी गौतम दोशी के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों पर धन शोधन निवारण कानून के तहत जांच चल रही है।
सीबीआई की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इसी वर्ष मार्च में सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान दोनों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की।
735 करोड़ रुपये के ऋण मामले में जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, 11 बैंकों के एक बैंकिंग समूह ने एक दूरसंचार कंपनी को कुल 735 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर किया था। आरोप है कि इस स्वीकृत ऋण में से करीब 114.98 करोड़ रुपये के उपयोग में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और धोखाधड़ी की गई।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि ऋण राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ था या नहीं तथा धन के प्रवाह में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी या नहीं।
48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली
गिरफ्तारी के बाद सतीश सेठ को अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड प्रदान की गई। चूंकि मामला दिल्ली में दर्ज है, इसलिए ईडी की टीम उन्हें राजधानी लाकर संबंधित अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की मांग कर सकती है।
पूर्व में संभाल चुके हैं बड़ी जिम्मेदारियां
सतीश सेठ लंबे समय तक रिलायंस समूह में शीर्ष पदों पर कार्य कर चुके हैं। उन्हें समूह के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारियों में गिना जाता था। उन्होंने समूह में प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई थी।
भूमिका की गहराई से जांच जारी
जांच एजेंसियां अब इस पूरे कथित बैंक ऋण घोटाले में दोनों पूर्व अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऋण वितरण, धन के उपयोग और वित्तीय लेनदेन में किस स्तर तक अनियमितताएं हुईं और उनमें संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।



