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19 की उम्र में पहली शादी, बेटी से दूरी और जिंदगी भर का पछतावा… नसीरुद्दीन शाह ने आत्मकथा में किए भावुक खुलासे

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा ‘एंड देन वन डे’ में निजी जिंदगी से जुड़े कई भावुक और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने अपनी पहली शादी, पहली पत्नी परवीन मुराद, बेटी हीबा और अपने जीवन की उन गलतियों का जिक्र किया है, जिनका अफसोस उन्हें आज भी है। अभिनेता ने स्वीकार किया कि कम उम्र में लिए गए फैसलों और अपरिपक्व सोच के कारण वह न तो अच्छे पति बन सके और न ही अपनी जिम्मेदारियां निभा पाए।

19 साल की उम्र में हुई थी पहली मुलाकात

नसीरुद्दीन शाह ने बताया कि उनकी मुलाकात परवीन मुराद से उस समय हुई थी, जब वह महज 19 वर्ष के थे और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। परवीन उनसे करीब 15 वर्ष बड़ी थीं। वह तलाकशुदा थीं और पहले से दो बच्चों की मां भी थीं।

उम्र और सामाजिक परिस्थितियों में बड़े अंतर के बावजूद दोनों एक-दूसरे के करीब आए। अभिनेता के अनुसार, परवीन पहली ऐसी शख्स थीं जिन्होंने उनके भीतर छिपे कलाकार पर विश्वास जताया और उनके अभिनय के सपनों को पहचान दी। यही विश्वास आगे चलकर प्यार में बदल गया।

परिवारों के विरोध के बावजूद की शादी

नसीरुद्दीन शाह के मुताबिक, दोनों के रिश्ते को परिवारों की मंजूरी नहीं मिली। उनके परिवार को परवीन के तलाकशुदा होने और दो बच्चों की मां होने पर आपत्ति थी, जबकि परवीन का परिवार दोनों के बीच उम्र के बड़े अंतर और नसीरुद्दीन की कम उम्र को लेकर चिंतित था। विरोध के बावजूद दोनों ने विवाह कर लिया और साथ रहने लगे।

बेटी के जन्म के बाद रिश्ते में बढ़ने लगी दूरियां

शादी के करीब एक साल बाद बेटी हीबा का जन्म हुआ, लेकिन इसी दौर में दोनों के रिश्ते में दूरियां भी बढ़ने लगीं। अपनी आत्मकथा में नसीरुद्दीन शाह ने स्वीकार किया कि उस समय वह पत्नी की भावनाओं को समझने में पूरी तरह असफल रहे।

उन्होंने लिखा कि अभिनय करियर और भविष्य को लेकर वह इतने व्यस्त थे कि परिवार और पत्नी की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सके। उन्होंने यह भी माना कि गर्भावस्था के दौरान वह पत्नी का साथ नहीं दे पाए और पिता बनने की जिम्मेदारी निभाने के लिए मानसिक रूप से भी तैयार नहीं थे।

बेटी हीबा को लेकर किया भावुक स्वीकार

अभिनेता ने अपनी बेटी हीबा के साथ रिश्ते को लेकर भी खुलकर लिखा है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई वर्षों तक वह अपनी बेटी से भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं पाए। उन्हें इस बात का आज भी गहरा पछतावा है कि उन्होंने पिता होने की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं निभाया। उनके अनुसार, यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलतियों में से एक रही, जिसका अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा।

रत्ना पाठक के साथ मिला नया जीवन

पहली शादी टूटने के दौरान थिएटर में उनकी मुलाकात अभिनेत्री रत्ना पाठक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती धीरे-धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई। परवीन मुराद से कानूनी रूप से अलग होने के बाद वर्ष 1982 में नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने विवाह किया।

अपनी आत्मकथा में अभिनेता ने रत्ना पाठक को अपने जीवन का सबसे सच्चा प्रेम बताया है। उन्होंने लिखा कि उनके साथ रहने के बाद ही वह रिश्तों की अहमियत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को सही मायनों में समझ पाए।

आत्मकथा में झलकता है आत्ममंथन

नसीरुद्दीन शाह की आत्मकथा केवल उनके निजी जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन फैसलों पर आत्ममंथन भी है जिन्हें वह अपनी सबसे बड़ी भूल मानते हैं। उन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए बताया कि सफलता की दौड़ में रिश्तों और परिवार की अनदेखी जीवनभर का पछतावा बन सकती है।

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