उत्तर प्रदेशराज्य

10 लाख के लोन ने बदली किस्मत! लखीमपुर के रामलखन बने ‘जॉब क्रिएटर’, डेयरी से हर महीने कमा रहे हजारों रुपये

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। लखीमपुर खीरी के एक ग्रामीण युवक ने सरकारी योजना के तहत मिले 10 लाख रुपये के ऋण की मदद से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल दिया। रामलखन की यह सफलता अब ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही है।

लखीमपुर खीरी जिले के देवरिया गांव निवासी रामलखन लंबे समय से अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देख रहे थे। उनके पास मेहनत और इच्छाशक्ति तो थी, लेकिन पूंजी की कमी के कारण वह अपने सपनों को साकार नहीं कर पा रहे थे। आर्थिक संसाधनों के अभाव में कोई बड़ा काम शुरू करना उनके लिए चुनौती बना हुआ था।

सरकारी योजना बनी सफलता की सीढ़ी

रामलखन को जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की जानकारी मिली। योजना के बारे में पता चलते ही उन्होंने आवेदन किया। उनकी लगन और व्यवसायिक सोच को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया, जिससे उनके उद्यमी बनने का सपना साकार होने लगा।

डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक तस्वीर

ऋण मिलने के बाद रामलखन ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा और डेयरी व्यवसाय शुरू किया। मेहनत और सही प्रबंधन के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया। वर्तमान में उनकी डेयरी से प्रतिदिन लगभग 5 से 8 क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है, जिसकी स्थानीय बाजार में नियमित आपूर्ति की जा रही है।

डेयरी व्यवसाय की बढ़ती सफलता ने न केवल उनकी आय में वृद्धि की है, बल्कि स्थानीय स्तर पर दूध की उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।

रोजगार मांगने वाले से बने रोजगार देने वाले

रामलखन की सफलता का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने अपनी डेयरी में गांव के तीन अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। आज उनका उद्यम कई परिवारों की आजीविका का सहारा बन चुका है।

व्यवसाय से जुड़े सभी खर्चों को निकालने के बाद रामलखन प्रतिमाह करीब 15 हजार से 30 हजार रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि दिखाती है कि सही योजना, मेहनत और सरकारी सहयोग मिलने पर ग्रामीण युवा भी सफल उद्यमी बन सकते हैं।

ग्रामीण उद्यमिता को मिल रही नई पहचान

रामलखन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बना रही हैं। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है और आत्मनिर्भरता का सपना भी मजबूत हो रहा है।

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