नेपाल में कुदरत का कहर! भूकंप के बाद ग्लेशियर फटा, विनाशकारी बाढ़ से 160 की मौत; 133 भारतीयों समेत 750 से ज्यादा लापता

काठमांडू/नई दिल्ली: तिब्बत सीमा के पास मध्य नेपाल के कई जिलों में बुधवार सुबह आए भीषण भूकंप के बाद ग्लेशियर फटने से अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक करीब 160 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों और 37 अप्रवासी भारतीयों समेत 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के तेज बहाव में कई शहर और गांव डूब गए हैं। कम से कम 19 प्रमुख पुल बह गए हैं, जबकि 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
भूकंप के कुछ ही मिनट बाद आई विनाशकारी बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद ही अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। घटनाक्रम को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर फटा और उसके बाद बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया। भोटे कोशी और लेंडे नदी का पानी तेजी से त्रिशूली नदी में पहुंचा, जिससे रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए। तबाही का असर राजधानी काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक देखा गया है।
133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर के तीर्थयात्री भी शामिल
लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक हैं। इनमें कम से कम 50 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। इसके अलावा आध्यात्मिक संस्था ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे। संस्था के संस्थापक सद्गुरु के मुताबिक केंद्र में मौजूद इन लोगों की स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। हालांकि संस्था के 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार लापता पर्यटकों में 37 तंजावुर के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश और केरल सहित कई भारतीय राज्यों ने अपने नागरिकों की तलाश के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की हैं।
नेपाल के सुरक्षाकर्मी भी लापता
इस आपदा में नेपाल सेना के 44 जवानों समेत कुल 80 सुरक्षाकर्मियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। बाढ़ के कारण कई इलाकों में संपर्क और आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात
भारत ने नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप भी नेपाल भेज दी गई है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार के साथ लगातार समन्वय कर राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है।
सेना और सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को खोज एवं राहत अभियान में लगाया गया है। नेपाल सेना ने बचाव कार्य के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। इसके साथ ही त्रिशूली में आपातकालीन चिकित्सा उपचार केंद्र भी स्थापित किया गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी प्रभावित क्षेत्रों में पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की शिगाजे टुकड़ी के 145 जवानों को तैनात कर बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। चीन की सीमा से लगे हिस्से में भी 3 लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है।



