
मुजफ्फरपुर: बिहार में जमीन संबंधी मामलों में फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां डीसीएलआर और अपर समाहर्ता के नाम पर नकली आदेश तैयार कर उन्हें ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है। इन फर्जी आदेशों के आधार पर अंचल कार्यालयों से भूमि संबंधी कार्य कराए जाने के खुलासे के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सतर्क हो गया है।
पूर्वी चंपारण में ऐसे मामले के उजागर होने के बाद विभाग की उपनिदेशक मोना झा ने राज्य के सभी अपर समाहर्ताओं, डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि उच्चतर राजस्व न्यायालय के किसी भी आदेश के अनुपालन से पहले उसका आरसीएमएस (राजस्व न्यायालय प्रकरण प्रबंधन प्रणाली) पोर्टल पर उपलब्ध मूल रिकॉर्ड से अनिवार्य रूप से मिलान किया जाए।
डीसीएलआर के नाम से जारी हुआ फर्जी आदेश
विभाग की ओर से जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि मोतिहारी सदर के डीसीएलआर के नाम से एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे आधार बनाकर अंचल कार्यालय से कार्रवाई करा ली गई। इस घटना ने राजस्व प्रशासन में सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभाग का मानना है कि दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और भूमि विवादों के अन्य मामलों में भी इस तरह के फर्जी आदेशों का इस्तेमाल कर गलत तरीके से लाभ उठाया जा सकता है।
अपने ही आदेश को देखकर डीसीएलआर को हुआ शक
मोतिहारी सदर की डीसीएलआर प्रीति कुमारी ने म्यूटेशन अपील से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान अपने न्यायालय से जारी आदेश की प्रति देखी। दस्तावेज पर नजर पड़ते ही उन्हें संदेह हुआ, जिसके बाद मूल आदेश से उसका मिलान कराया गया।
जांच में सामने आया कि सदर अंचल कार्यालय में जमा कराई गई प्रति पूरी तरह फर्जी थी। आदेश में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर, ज्ञापांक और दिनांक तक नकली पाए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर दो मामलों में म्यूटेशन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।
साइबर कैफे से जुड़े तार, दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले की जांच के दौरान प्राथमिकी दर्ज की गई। शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने में एक साइबर कैफे की भूमिका रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी आदेश तैयार करने और उन्हें ऑनलाइन अपलोड कराने के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अब सभी अधिकारियों को आरसीएमएस पोर्टल पर उपलब्ध मूल आदेश से दस्तावेजों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है।
सीतामढ़ी में भी सामने आया समान मामला
पूर्वी चंपारण के अलावा सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां अंचलाधिकारी के आदेश को डीसीएलआर ने निरस्त कर दिया था और बाद में अपर समाहर्ता ने भी डीसीएलआर के निर्णय को सही ठहराया।
इसके बावजूद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अंचल कार्यालय से आदेश के विपरीत कार्रवाई करा ली गई। मामला अब प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर तक पहुंच चुका है और इसकी जांच जारी है।
सरकार की चिंता बढ़ी, सत्यापन प्रक्रिया होगी सख्त
लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह संकेत दिया है कि ऑनलाइन सिस्टम का दुरुपयोग कर भूमि संबंधी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और हर आदेश का डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।



