दस्तक-विशेष

1947 में आज ही के दिन पति पत्नी को एक साथ दिया गया था चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार

नई दिल्ली ( दस्तक विशेष) : 1947 में आज ही के दिन यानि 23 अक्टूबर को गेर्टी कोरी और उनके पति कार्ल कोरी को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया। यह पहला मौका था जब पति पत्नी को एकसाथ नोबेल पुरस्कार दिया गया था। 1929 में उन्होंने कार्बोहाइड्रेट साइकिल का सिद्धांत पेश किया। इसे ‘कोरी साइकिल’ भी कहते हैं। इसमें बताया गया कि कार्बोहाइड्रेट कैसे खुद को विघटित कर शरीर को ऊर्जा देता है और जरूरत ना हो तो यह शरीर में संचित हो जाता है। इससे डाइबिटीज के इलाज में काफी मदद मिली।

ग्लूकोज और ग्लाइकॉजन पर रिसर्च के लिए कार्ल फर्डिनेंड कोरी को जर्टी थेरेसा कोरी को 1947 में नोबेल मिला था। दोनों की खोज इस पर केंद्रित थी कि शरीर में जाने पर ग्लूकोज में क्या परिवर्तन होता है और यह किस काम आता है।

कार्ल और गर्टी कोरी को इस बात में दिलचस्पी थी कि शरीर एनर्जी का इस्तेमाल कैसे करता है। 1929 में, उन्होंने कोरी साइकिल के बारे में बताया; यह मेटाबॉलिज्म का एक ज़रूरी हिस्सा है। जब हम अपनी मसल्स का इस्तेमाल करते हैं तो लैक्टिक एसिड बनता है, जो फिर लिवर में ग्लाइकोजन में बदल जाता है। ग्लाइकोजन, बदले में, ग्लूकोज में बदल जाता है, जिसे मसल्स सेल्स एब्जॉर्ब कर लेती हैं। दोनों ने यह पता लगाना जारी रखा कि ग्लाइकोजन ग्लूकोज में कैसे टूटता है और 1938-1939 में, वे उस एंजाइम की पहचान करने में कामयाब रहे जो डीकंपोज़िशन शुरू करता है और टेस्ट ट्यूब में ग्लाइकोजन बनाने के लिए प्रोसेस का इस्तेमाल भी कर पाए।

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