Rishikesh News: स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद से विश्व पर्यावरण दिवस, परमार्थ निकेतन से एक शक्तिशाली आह्वान के रूप में मनाया गया, जिसका उद्देश्य सजग जीवनशैली, सामूहिक प्रयास एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के माध्यम से हमारे आंतरिक एवं बाह्य पर्यावरण को स्वस्थ करना था।
स्वस्थ भविष्य के निर्माण की कल्पना
परमार्थ निकेतन एवं ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस (जीवा) द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) तथा संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) के सहयोग से आयोजित यह संगम आध्यात्म, सततता और सामाजिक सेवा का एक पावन मिलन था, जिसमें धर्मगुरुओं, नीति-निर्माता, पर्यावरणविद्, कलाकार और समाज परिवर्तनकर्ता एक साथ आए, ताकि सभी के लिए एक स्वस्थ और सतत भविष्य का निर्माण किया जा सके।
पृथ्वी संरक्षण के लिए परिवर्तनकारी शक्ति
“आस्था, आहार एवं परिधान, सतत जीवनशैली पहल” के अंतर्गत आयोजित इस विशेष सत्र में आध्यात्मिक विभूतियों, प्रतिनिधियों, संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, युवाओं तथा प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री एवं पर्यावरण प्रेरक रवीना टंडन जी ने सहभाग किया और इस पर विचार-विमर्श किया कि भोजन, फैशन और आस्था – हमारे दैनिक चयन किस प्रकार पृथ्वी संरक्षण के लिए परिवर्तनकारी शक्ति बन सकते हैं।
प्रातःकाल मां गंगा के तट, महर्षि महेश योगी आश्रम के निकट, विश्व पर्यावरण दिवस स्वच्छता अभियान चलाया गया। सभी ने सेवा भाव के साथ इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा का संकल्प लिया। यह पहल इस बात का सशक्त संदेश थी कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयास से होती है।
जागरूकता और संतुलन से प्रारंभ
इसके पश्चात सभी ने विश्व पर्यावरण दिवस विश्व शान्ति यज्ञ सहभाग किया। इस यज्ञ के माध्यम से अनेकों श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों तक सतत जीवन शैली का संदेश पहुँचा। कार्यक्रम का मुख्य विषय “आंतरिक पर्यावरण – बाह्य पर्यावरण – वैश्विक शांति का मार्ग” रहा, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि पृथ्वी का उपचार पहले हमारे भीतर जागरूकता और संतुलन से प्रारंभ होता है। गंगा नंदिनी (जीवा) ने सभी अतिथियों का स्वागत, अभिनन्दन करते हुए अध्यात्म और सतत जीवन शैली के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि धर्म आधारित समुदाय व्यवहार परिवर्तन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के लिए अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।
एक पेड़ धरती मां के नाम
कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रीराम कथा के मंच पर दीप प्रज्ज्वलन, सामूहिक पर्यावरण संकल्प, पौधारोपण अभियान (एक पेड़ माँ के नाम-एक पेड़ धरती मां के नाम) तथा गंगा तट की स्वच्छता जैसे पवित्र आयोजनों के साथ किया। सभी प्रतिभागियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने, सतत जीवन अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का संकल्प लिया। सभी विभूतियों में तुलसी जी के पौधे को जल अर्पित कर पौधों के प्रति सम्मान का संदेश दिया।
परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में “धरती माता की जय” के उद्घोष के साथ कहा कि यदि धरती को बचाना है तो पेड़ लगाने होंगे। पानी तो हम बना नहीं सकते, लेकिन उसे बचा सकते हैं। प्लास्टिक, विशेषकर सिंगल यूज प्लास्टिक को हमें जड़ से समाप्त करना होगा। हमारे वेदों में कहा गया है “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” धरती हमारी माता है और हम उसकी संताने हैं इसलिए हमें जल संरक्षण करना होगा, बिजली का संरक्षण करना होगा और अपने एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए।



