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‘भोजपुरी सिनेमा को नई पहचान हमारी फिल्मों ने दिलाई’, मनोज तिवारी के बयान से फिर छिड़ी पुरानी बहस

नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के दो बड़े और चर्चित चेहरों मनोज तिवारी और रवि किशन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। क्षेत्रीय फिल्म जगत में लंबे समय से दोनों कलाकारों के योगदान की तुलना होती रही है। अब हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के विकास और लोकप्रियता को लेकर अपनी राय रखी है, जिसके बाद यह बहस फिर सुर्खियों में आ गई है।

भोजपुरी इंडस्ट्री को नई दिशा देने का किया दावा

इंटरव्यू के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि उनकी फिल्मों ने भोजपुरी सिनेमा को व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि उनकी एक चर्चित फिल्म ने सीमित बजट में अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी, जिसने पूरी इंडस्ट्री के लिए नए अवसर पैदा किए। उनके मुताबिक उस सफलता के बाद निर्माताओं और निवेशकों का भरोसा भोजपुरी सिनेमा पर बढ़ा और फिल्म निर्माण को नई गति मिली।

रवि किशन की भूमिका पर भी रखी अपनी बात

जब बातचीत के दौरान उनसे रवि किशन के योगदान को लेकर सवाल पूछा गया तो मनोज तिवारी ने कहा कि रवि किशन पहले से भोजपुरी फिल्मों में सक्रिय थे, लेकिन उस दौर में इंडस्ट्री का दायरा और बाजार काफी सीमित था। उन्होंने दावा किया कि उनकी फिल्मों की सफलता के बाद भोजपुरी सिनेमा को बड़े स्तर पर पहचान मिली और कलाकारों के लिए आर्थिक संभावनाएं भी बढ़ीं।

कम बजट की फिल्म ने बनाया था रिकॉर्ड

मनोज तिवारी ने अपनी एक सफल फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि अपेक्षाकृत कम लागत में बनी उस फिल्म ने रिकॉर्ड कमाई की थी। उनके अनुसार उस दौर की सफलता ने यह साबित किया कि भोजपुरी फिल्में भी व्यावसायिक रूप से बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं। इसी के बाद बड़ी संख्या में नई फिल्मों का निर्माण शुरू हुआ और इंडस्ट्री का विस्तार हुआ।

कलाकारों की फीस और बदलते दौर का भी किया जिक्र

बातचीत में उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती व्यावसायिक दौर की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय कलाकारों को आज की तुलना में काफी कम पारिश्रमिक मिलता था। हालांकि समय के साथ इंडस्ट्री का स्वरूप बदला और कलाकारों को बेहतर अवसर तथा आर्थिक लाभ मिलने लगे।

राजनीति में साथ, योगदान पर अलग-अलग दावे

दिलचस्प बात यह है कि मनोज तिवारी और रवि किशन दोनों ही अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और एक ही राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद भोजपुरी सिनेमा के विकास में योगदान को लेकर दोनों के नाम समय-समय पर चर्चा का केंद्र बनते रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर दोनों नेता एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त करते रहे हैं, लेकिन इंडस्ट्री के इतिहास और उपलब्धियों को लेकर बयानबाजी अक्सर सुर्खियां बटोरती है।

फिर चर्चा में आया भोजपुरी सिनेमा का सफर

भोजपुरी सिनेमा आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री में शामिल है। इसकी लोकप्रियता देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ी है। ऐसे में इसके विकास में किस कलाकार की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही, इसे लेकर बहस समय-समय पर सामने आती रहती है। मनोज तिवारी के ताजा बयान ने इस चर्चा को एक बार फिर नया आयाम दे दिया है।

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