CM मोहन यादव की जमीन खरीद पर सियासी घमासान, BJP ने किया बचाव; अमित मालवीय बोले- आरोपों की बुनियाद ही खोखली

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा जमीन खरीद से जुड़े मामले ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी खुलकर मुख्यमंत्री के बचाव में उतर आई है। पार्टी के आईटी विभाग प्रमुख अमित मालवीय, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने आरोपों को पूरी तरह निराधार, राजनीतिक प्रेरित और तथ्यों से परे बताया है।
विवाद उस रिपोर्ट को लेकर सामने आया जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने उन इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है, जहां हाईवे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विकास हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने 168 एकड़ जमीन खरीदी, जिसकी अनुमानित कीमत 45 करोड़ रुपये बताई गई है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद 137 प्लॉट खरीदने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे। इनमें कुल 168 एकड़ भूमि शामिल है। दावा किया गया कि इन जमीनों का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में स्थित है जहां नई सड़क परियोजनाओं और हाईवे विकास की योजनाएं चल रही हैं।
खतौनी रिकॉर्ड के मुताबिक, इन जमीनों की खरीद मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाइयों नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, उनके पुत्र अभय यादव तथा चचेरे भाइयों गोविंद यादव और नीलेश यादव के नाम पर की गई है।
अमित मालवीय बोले- विपक्ष का अभियान तथ्यों पर नहीं टिका
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिस रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसी की बुनियाद कमजोर साबित हो रही है।
मालवीय ने कहा कि उज्जैन मास्टर प्लान मई 2023 में ही सार्वजनिक कर दिया गया था, जबकि मोहन यादव दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बने। उनके अनुसार शहर के विकास, सड़क परियोजनाओं और आधारभूत संरचना से जुड़ी जानकारी पहले से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध थी, इसलिए किसी प्रकार के “इनसाइडर लाभ” का सवाल ही नहीं उठता।
परिवार की जमीन खरीद को लेकर क्या हैं दावे?
रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव ने जून-जुलाई 2025 के दौरान उज्जैन के गांगेड़ी क्षेत्र में उज्जैन-बड़नगर और उज्जैन-इंदौर हाईवे जंक्शन के पास 10.35 एकड़ भूमि के 12 प्लॉट खरीदे। इनकी कुल कीमत 1.03 करोड़ रुपये बताई गई है।
वहीं, श्री देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव की क्रमशः 47.3 प्रतिशत और 25.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है, ने दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच उज्जैन के सावरखेड़ी और कस्बा क्षेत्र में कुल 2.6 एकड़ के तीन प्लॉट खरीदे। इनकी कीमत लगभग 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है।
इसके अलावा, श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सितंबर 2024 में उज्जैन के ढेडिया क्षेत्र में मुख्यमंत्री के चचेरे भाई नीलेश यादव को करीब 12 एकड़ जमीन 6.01 करोड़ रुपये में बेचे जाने का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि इस भूमि पर आवासीय परियोजना विकसित की जा रही है।
सड़क परियोजनाओं के आसपास जमीन खरीदने का आरोप
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा खरीदी गई करीब दो-तिहाई जमीन नई सड़क परियोजनाओं और प्रस्तावित हाईवे के आसपास स्थित है। हालांकि बीजेपी का कहना है कि इन परियोजनाओं की जानकारी पहले से सार्वजनिक थी और इसमें किसी प्रकार की गोपनीय सूचना का इस्तेमाल नहीं किया गया।
2021 से 2023 के बीच भी हुई थी जमीन खरीद
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार ने वर्ष 2021 से 2023 के बीच भी उज्जैन में सीधे या अपनी कंपनियों के माध्यम से लगभग 85 एकड़ भूमि खरीदी थी। उस समय मोहन यादव राज्य सरकार में मंत्री थे। 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र में उन्होंने अपने और पत्नी के नाम दर्ज भूमि का विवरण भी दिया था।
हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुनावी हलफनामे में अपनी और पत्नी की सभी संपत्तियों का विवरण पहले ही सार्वजनिक किया था और तब से उसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव के नाम दर्ज 16 एकड़ भूमि वर्ष 2023 से पहले की है और मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। खंडेलवाल के अनुसार, श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड के पास 2023 में लगभग 68 एकड़ भूमि थी, जो अब घटकर करीब 65 एकड़ रह गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोहन यादव ने वर्ष 2017 में कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था और वर्तमान में कंपनी के संचालन से उनका कोई संबंध नहीं है।
जांच की मांग पर मंत्री राकेश सिंह का बड़ा बयान
मध्य प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यदि किसी पक्ष द्वारा जांच की मांग की जाती है तो उसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए।
फिलहाल जमीन खरीद के इस मामले को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। एक ओर कांग्रेस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है, वहीं बीजेपी इसे विपक्ष का राजनीतिक अभियान बता रही है।



