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राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये वसूलने की तैयारी में पंजाब सरकार, CM भगवंत मान बोले- पानी की बूंद-बूंद का लेंगे हिसाब

चंडीगढ़: पंजाब और राजस्थान के बीच नहरी पानी को लेकर विवाद एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान से पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है। विधानसभा के विशेष सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए मान ने कहा कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पानी की रॉयल्टी देता रहा है, लेकिन अब पंजाब से पानी लेकर उसका इस्तेमाल कर रहा है और उससे आर्थिक लाभ भी कमा रहा है। पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भी इस मांग को लेकर सदन में प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, राजस्थान सरकार पहले ही पंजाब की इस मांग को खारिज कर चुकी है।

पंजाब का आरोप- मुफ्त पानी से आर्थिक फायदा उठा रहा राजस्थान

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में कहा कि पंजाब से राजस्थान को पानी मिलता रहा है, लेकिन इसके बदले राज्य को उचित भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने पानी की तुलना कच्चे माल से करते हुए तर्क दिया कि पंजाब से बिना कीमत चुकाए पानी लेकर राजस्थान उससे फायदा उठा रहा है।

मान ने दावा किया कि पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का हक बनता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पानी की एक-एक बूंद का हिसाब मांगेगी। जरूरत पड़ने पर इस मामले को अदालत से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।

विधानसभा में प्रस्ताव, केंद्र से भी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग

पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राजस्थान से पानी की रॉयल्टी वसूलने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इसमें पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं। ऐसे में राजस्थान को इन नदियों के संदर्भ में रिपेरियन राज्य यानी नदी के किनारे स्थित राज्य नहीं माना जा सकता।

प्रस्ताव में कहा गया कि दशकों से पंजाब का पानी राजस्थान को दिया जा रहा है, जबकि पंजाब खुद जल संकट का सामना कर रहा है। पंजाब सरकार का आरोप है कि राजस्थान इस पानी का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ हासिल कर रहा है।

प्रस्ताव के जरिए राजस्थान से पानी की कीमत वसूलने के साथ केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की गई है। पंजाब चाहता है कि भविष्य में राजस्थान को दिए जाने वाले पानी के बदले हर साल राज्य को भुगतान मिलना सुनिश्चित किया जाए।

मार्च में भी उठा था मामला, राजस्थान ने मांग ठुकराई

पंजाब सरकार इससे पहले भी राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांग चुकी है। इसी साल 19 मार्च को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह मांग उठाते हुए पानी रोकने की चेतावनी दी थी। इसके अगले दिन 20 मार्च को राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब की मांग को खारिज कर दिया था।

राजस्थान सरकार का कहना था कि पानी पर किसी एक राज्य की ओर से रॉयल्टी या व्यावसायिक भुगतान का दावा संवैधानिक प्रावधानों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि वह पंजाब को रॉयल्टी का भुगतान नहीं करेगी।

1920 के समझौते का हवाला दे रहा राजस्थान

राजस्थान सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 1920 में हुए समझौते का हवाला भी दिया था। यह समझौता ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। इसके तहत बीकानेर रियासत की करीब पांच लाख एकड़ जमीन के लिए पानी का आवंटन तय किया गया था।

राजस्थान के मुताबिक, उस समझौते में पानी के बदले शुल्क ब्रिटिश सरकार को दिया जाना था, पंजाब प्रांत को नहीं। इसी आधार पर राजस्थान सरकार पंजाब की मौजूदा रॉयल्टी मांग को स्वीकार करने से इनकार करती रही है। दोनों राज्यों के बीच विवाद का एक प्रमुख आधार पुराने समझौतों की अलग-अलग व्याख्या भी है।

पानी के मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी हलचल

पंजाब सरकार की ओर से विधानसभा में प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद पानी और रॉयल्टी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। इस विवाद के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, हालांकि इसे किसी चुनावी रणनीति से जोड़ना फिलहाल राजनीतिक आकलन ही है।

एक ओर पंजाब सरकार पुराने समझौतों और पानी के भुगतान का सवाल उठा रही है, वहीं राजस्थान सरकार रॉयल्टी देने से इनकार कर चुकी है। ऐसे में आगे दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने की आशंका है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि पंजाब सरकार अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाती है और राजस्थान सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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