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वैशाख अमावस्या 2026 पर पंचक का साया, 5 दिन का अशुभ योग, इन कामों को करने से बचे

नई दिल्ली : अमावस्या तिथि को पितरों की शांति, पूजा-पाठ और आत्मिक शुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन स्नान और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। लेकिन इस बार वैशाख अमावस्या 2026 पर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, जिससे इस तिथि का महत्व और संवेदनशीलता दोनों बढ़ गए हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संयोग में कुछ कार्यों से परहेज न करने पर जीवन में बाधाएं, मानसिक अशांति और नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं।

पंचक की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 की तड़के सुबह से हो चुकी है, जो 17 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:02 बजे समाप्त होगा। वहीं वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। ऐसे में अमावस्या से जुड़े स्नान, दान और पितृ कर्म पंचक काल के दौरान ही किए जाएंगे, जिससे यह संयोग और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है। इनमें किसी भी प्रकार के शुभ कार्य की शुरुआत शामिल है। शादी, सगाई, रोका, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्य इस समय नहीं करने चाहिए।

पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को अशुभ माना जाता है। साथ ही इस समय लकड़ी, ईंधन या किसी भी प्रकार की ज्वलनशील वस्तु खरीदने से बचना चाहिए। इसके अलावा बिस्तर, पलंग या शैय्या जैसी वस्तुओं की खरीद भी वर्जित मानी जाती है।

मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान घर के निर्माण की शुरुआत या छत डालने का कार्य नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में रुकावटें और नकारात्मकता बढ़ने की बात कही जाती है। अमावस्या की रात को विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस समय सुनसान स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। साथ ही बुजुर्गों और पितरों के प्रति सम्मान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है, क्योंकि इस दिन किए गए गलत व्यवहार का प्रभाव अधिक गंभीर माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान करना शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और गंगाजल छिड़कने से नकारात्मकता दूर होने और मानसिक शांति मिलने की बात कही जाती है।

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