‘विपक्ष में बैठने का मतलब देश को गुमराह करना नहीं’… पेपर लीक पर गजेंद्र सिंह शेखावत का कांग्रेस पर तीखा हमला

जयपुर: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में बैठने से किसी को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर देश को गुमराह करने का अधिकार नहीं मिल जाता। शेखावत ने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी समस्या को सबसे अधिक कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में बढ़ावा मिला और राजस्थान में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सामने आए लगातार मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया।
उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की कई घटनाएं सामने आईं, जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा परीक्षा प्रणाली से डगमगा गया। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय उसी दौर में हुआ।
केंद्र सरकार के कदमों का किया उल्लेख
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें वर्षों तक पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर सकीं। इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने केवल बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए हैं, परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत किया है और ऐसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से कार्रवाई की व्यवस्था की है।
संसद में चर्चा से बचने का लगाया आरोप
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर गंभीर चर्चा करनी हो तो संसद से बड़ा लोकतांत्रिक मंच कोई नहीं हो सकता। उनके अनुसार सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बहस के बजाय हंगामा और राजनीतिक प्रदर्शन का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सार्थक बहस सबसे प्रभावी माध्यम हैं, लेकिन विपक्ष ने समाधान की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी।
‘युवाओं के भविष्य पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’
शेखावत ने कहा कि पेपर लीक जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश उचित नहीं है। उनके अनुसार देश के युवाओं को नारों की नहीं, बल्कि पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं का असर केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे लाखों युवाओं का समय, करियर और मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जरूरी है।
राजस्थान की पूर्व सरकार का किया जिक्र
अपने बयान में केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान की पूर्व अशोक गहलोत सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कार्यकाल में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए थे, जिससे भर्ती प्रक्रियाएं लगातार विवादों में रहीं। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने पर जोर
शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि सख्त कानून, मजबूत निगरानी व्यवस्था और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की सबसे बड़ी अपेक्षा निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समय पर न्याय है। सरकार इसी लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है और विपक्ष को भी इस विषय पर सकारात्मक सहयोग करना चाहिए।



