दिल्ली के भूतपूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना की पुण्यतिथि पर उनसे जुड़ी ख़ास बातें

नई दिल्ली ( दस्तक विशेष) : मदन लाल खुराना भारतीय राजनीति और विशेषकर दिल्ली की राजनीति का जाना माना नाम हैं। आज उनकी पुण्यतिथि है। वे दिसंबर 1993 से फरवरी 1996 तक दिल्ली के तीसरे मुख्यमंत्री रहे। वे दिल्ली की राजनीति में अपनी बेबाकी, आक्रामक शैली और जन-आधार के कारण ‘दिल्ली के शेर’ के नाम से जाने जाते थे। साल 1984 के आम चुनाव में जब भाजपा को करारी हार मिली थी, तब उन्होंने दिल्ली में पार्टी और संगठन को दोबारा खड़ा करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 1998 से 1999 तक संसदीय कार्य मंत्री और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य किया।

शुरुआती जीवन और शिक्षा:
मदन लाल खुराना जी का जन्म 15 अक्टूबर 1936 को ल्याल्लपुर (वर्तमान फैसलाबाद) में हुआ। उनके पिता का नाम एसडी खुराना और माँ का नाम लक्ष्मी देवी था। भारत के विभाजन के समय उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा और नई दिल्ली के कीर्ति नगर के शरणार्थी शिविर में रहे।उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से प्राप्त की। इसके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी शिक्षा ग्रहण की। इलाहाबाद में ही उनकी छात्र राजनीति की शुरुआत हुई और इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के महामंत्री भी चुने गए।
1960 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सचिव बने। सक्रिय राजनीति में आने से पहले उन्होंने पीजीडीएवी कॉलेज में अध्यापन किया। वहीं पर प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा, केदारनाथ साहनी जैसे नेताओं के साथ मिलकर दिल्ली में जनसंघ को स्थापित किया। वह 1965 से 67 तक जनसंघ के महामंत्री रहे।1984 में जब भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह से हार हुई तब राजधानी दिल्ली में फिर से पार्टी को खड़ा करने में खुराना का बड़ा योगदान था।

केन्द्र में जब पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी तो मदन लाल खुराना जी केंद्रीय मंत्री बने। उन्होंने दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष (29 मार्च से 19 दिसंबर 2003) तक पार्टी की कमान संभाली और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभाई।मदनलाल खुराना जी 1977 से 1980 तक दिल्ली के कार्यकारी पार्षद रहे। उसके बाद दो बार महानगर पार्षद बने।

जब शरणार्थी ने ली सीएम पद की शपथ :
दिल्ली को जब राज्य का दर्जा मिला तो वह 1993 में पहले मुख्यमंत्री चुने गए। इस पद पर वह 1996 तक रहे। 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार के कार्यकाल में जब 69वें संविधान संशोधन को मंजूरी मिली। यह संशोधन 1993 में लागू हुआ। इसके बाद ही दिल्ली को फिर से उसकी विधानसभा मिली। दिल्ली में फिर चुनाव हुए। उस समय बीजेपी की तरफ से नारा गूंजा था, दिल्ली का एक ही लाल, मदनलाल, मदन लाल। इस चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त जीत मिली। बीजेपी ने 70 में 49 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस के खाते में महज 14 सीटें ही आईं। बीजेपी की जीत के हीरो रहे मदन लाल खुराना। मदन लाल खुराना का कद उस समय दिल्ली की राजनीति में काफी ऊंचा था।

साथ ही उनके पीठ पर मुरली मनोहर जोशी का भी हाथ था। मुरली मनोहर जोशी ने उस समय ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ा था। उनके बाद आडवाणी ने पार्टी की कमान संभाली थी। कहा जाता है कि उस समय आडवाणी नहीं चाहते थे कि मदन लाल खुराना सीएम बनें लेकिन मुरली मनोहर जोशी ने उनके लिए आडवाणी को राजी कर लिया था। इसके बाद कभी दिल्ली में शरणार्थी बन कर पहुंचे खुराना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली। खुराना 2 दिसंबर 1993 से 26 फरवरी 1996 तक दिल्ली के सीएम रहे। जैन हवाला डायरी केस में नाम आने के बाद खुराना ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके बाद साहिब सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। 2013 में मदन लाल खुराना को ब्रेन हेमरेज हुआ जिस कारण वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए और 27 अक्टूबर 2018 को उनका निधन हो गया।



