अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान, सेमीकंडक्टर्स की मैन्युफैक्चरिंग का हब हैं ताइवान

ताइपे : चीन की तमाम चेतावनियों के बाद भी अमेरिकी संसद की स्पीकर नैन्सी पेलोसी के ताइवान दौरे ने वैश्विक राजनीति में उबाल ला दिया है। एक तरफ चीन ने गुरुवार से ताइवान की सीमाओं को घेरकर युद्धाभ्यास करने का ऐलान किया है तो वहीं अमेरिका का कहना है कि वह हर हालात में उसके साथ है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़े तनाव से आशंकाएं पैदा हो गई हैं क्या ताइवान अगला यूक्रेन बन सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह ताइवान के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया और हमारे आपके लिए भी चिंता की बात होगी। इसकी वजह ताइवान की इकॉनमी और उसका मैन्युफैक्चरिंग हब होना है।

दरअसल क्षेत्रफल के मामले में भले ही ताइवान छोटा सा देश है, लेकिन 600 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ वह दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है। यही नहीं आज दुनिया भर में बिक रहे स्मार्टफोन, कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए सबसे अहम कहे जाने वाले सेमीकंडक्टर्स की मैन्युफैक्चरिंग का हब भी है। पिछले दिनों ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन के चेयरपर्सन मार्क लिउ ने इसी बात का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि चीन ताइवान पर अटैक करता है तो फिर दुनिया की सबसे अडवांस चिप फैक्ट्री काम नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि क्योंकि हम ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर हैं। इसलिए अटैक की स्थिति में हमारे लिए काम करना मुश्किल होगा।

मार्क लिउ के इस बयान में उनकी कंपनी के लिए चिंता तो है ही, लेकिन यह पूरी दुनिया के लिए भी एक चेतावनी जैसा है। दरअसल ताइवान ने बीते दो दशकों में तेजी से विकास किया है और वह सेमीकंडक्टर चिप, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम और डिफेंस आइटम्स के उत्पादन में अग्रणी देश है। खासतौर पर मोबाइल, कार, टीवी समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में इनकी जरूरत होती है और दुनिया भर में सेमीकंडक्टर्स के उत्पादन में उसकी 50 फीसदी हिस्सेदारी है। इससे हम समझ सकते हैं कि ताइवान पर यदि अटैक होता है तो यह दुनिया के लिए कितना भारी होगा।

मार्क लिउ ने भी इसी बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि यदि ताइवान पर अटैक होता है तो कोई विनर नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया लूजर होगी। उन्होंने कहा कि ताइवान पर हमले से चीन, अमेरिका और पश्चिमी देशों की इकॉनमी को बड़ा झटका लगेगा। बता दें कि ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी नामी टेक कंपनियां ताइवान पर ही सेमीकंडक्टर्स के लिए निर्भर हैं। कोरोना काल में भी जब चीन से सेमीकंडक्टर्स की सप्लाई बाधित हुई थी तो ताइवान ने ही पूरी दुनिया में आपूर्ति जारी रखी थी। साफ है कि यूक्रेन पर अटैक के बााद गेहूं जैसी चीजों के लिए तरसने वाली दुनिया तकनीकी संकट का सामना कर सकती है।

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