
नई दिल्ली: परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली एकादशी मानी जाती है। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी के साथ-साथ पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है। साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी 21 सितंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है।
देवशयनी एकादशी से शुरू होती है योगनिद्रा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास की अवधि शुरू मानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करते हैं।
इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। देवशयनी और देवउठनी एकादशी के बीच भाद्रपद शुक्ल एकादशी आती है, जिसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है परिवर्तिनी एकादशी
धार्मिक मान्यता के अनुसार चार महीने की योगनिद्रा के बीच परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी करवट बदलते हैं। इसे भगवान के विश्राम के दौरान होने वाले परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी पड़ा। इसे पार्श्व एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु के प्रति भक्ति, आत्मसंयम और समर्पण को विशेष महत्व दिया जाता है।
वामन अवतार और राजा बलि से क्या संबंध
परिवर्तिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा से भी बताया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि ने वामन भगवान की मांग स्वीकार कर ली।
इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया। उन्होंने दो पग में पृथ्वी और स्वर्ग लोक को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने कर दिया।
राजा बलि को मिला पाताल लोक का राज्य
राजा बलि की भक्ति और समर्पण से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने राजा बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने बलि को यह वरदान भी दिया कि वह हर वर्ष चार महीने के लिए पाताल लोक में उनके यहां निवास करेंगे।
इसी कथा को चातुर्मास की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। इस तरह परिवर्तिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु की योगनिद्रा के दौरान करवट बदलने की मान्यता के साथ-साथ उनके वामन अवतार और राजा बलि की भक्ति से भी बताया जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी के दिन भक्त भगवान विष्णु और उनके वामन स्वरूप की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस एकादशी को आत्मसंयम, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का पर्व माना गया है।



