सोने की खरीद और विदेशी यात्रा पर 1 साल रोक की अपील क्यों? पीएम मोदी के बयान के बाद जानें कीमतों पर क्या होगा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से सोने की खरीद, विदेश यात्रा और पेट्रोल-डीजल के सीमित उपयोग की अपील की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत पर विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित बनाए रखने का दबाव बढ़ रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए देश को अपने संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना होगा। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया जा रहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे और युद्ध जैसी परिस्थितियों का अर्थव्यवस्था पर असर कम से कम हो। इसी वजह से सोने की खरीद और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं में संयम बरतने की अपील की गई है।
पेट्रोल-डीजल की खपत पर भी सावधानी की सलाह
पीएम मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस जैसे ईंधनों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत को ईंधन खपत में सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
घटता विदेशी मुद्रा भंडार और वैश्विक दबाव
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले यह 728.494 अरब डॉलर के उच्च स्तर तक पहुंचा था। विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और रुपये पर दबाव के चलते आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे डॉलर रिजर्व पर असर पड़ा।
कच्चा तेल और युद्ध का भारत पर असर
विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत अपनी 80 से 85 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अर्थव्यवस्था पर सीधे दिखता है। अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से आर्थिक विकास दर में 0.15 प्रतिशत की कमी और महंगाई में 0.30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
भारत में सोने के आयात का बड़ा बोझ
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है और अपनी कुल मांग का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। देश हर साल औसतन 700 से 800 टन सोना आयात करता है, जो आयात बिल का बड़ा हिस्सा बनता है। वर्ष 2025-26 में सोने का आयात बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे व्यापार घाटा भी 333.2 अरब डॉलर तक बढ़ गया है।
कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी
आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल 775 अरब डॉलर के आयात में कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और उर्वरक प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं। इनमें सोने का हिस्सा करीब 10 प्रतिशत बताया जा रहा है, जो विदेशी मुद्रा पर महत्वपूर्ण दबाव डालता है।
रुपये पर दबाव और आर्थिक संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ सोने का भारी आयात रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ऐसे में पीएम मोदी का संदेश व्यापक आर्थिक स्थिरता और आयात प्रबंधन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सोने की कीमतों में मौजूदा रुझान
सोमवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,52,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतें मुख्य रूप से वैश्विक कारकों जैसे डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों और कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होती हैं।
आने वाले समय में कीमतों पर असर
जानकारों के अनुसार, भले ही सोने की घरेलू खरीद में कुछ कमी आए, लेकिन इससे वैश्विक स्तर पर कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष सोने की कीमतों में मौजूदा स्तर से 12 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है।



