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तालाब में घपला, दो इंजीनियरों पर एक करोड़ जुर्माना, 12 साल जेल की सजा

दस्तक टाइम्स/एजेंसी- छत्तीसगढ़ : सुकमा. सुकमा कोर्ट ने गुरुवार को गबन और धोखाधड़ी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। r1_1444956521ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग (अारईएस) के दो इंजीनियरों को चार अलग-अलग धाराओं में 12 साल का कारावास और 50-50 लाख (कुल एक करोड़)जुर्माने की सजा सुनाई। सूखा राहत के लिए शासन से आवंटित राशि डकारने के आरोप में दस साल पहले तीन सब-इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक सब-इंजीनियर पीआर ठाकुर की मौत हो चुकी है।
 
सीजीएम प्रभाकर ग्वाल ने इंजीनियर विलास जाधव और एमके रुग्गी को 4 अलग-अलग धाराओं में 6-6 वर्ष की सजा और 50 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। रुग्गी भैरमगढ़ में एसडीओ हैं। इस मामले में 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। कोर्ट ने दोनों को धारा 409 के तहत छह वर्ष सजा व 15 लाख जुर्माना, धारा 420 के तहत 6 साल कैद और 10 लाख जुर्माना, धारा 467 के तहत 6 साल जेल और 15 लाख जुर्माना और धारा 468 के तहत 6 वर्ष कैद और 10 लाख जुर्माना लगाया है।
 
कोर्ट के मुताबिक धारा 409 और 420 की सजा एक साथ चलेगी। इसके भुगतने के बाद धारा 467 और 468 का सश्रम कारावास साथ चलेगा। यानी आरोपियों को कुल मिलाकर 12 साल जेल में रहना पड़ेगा। जुर्माना नहीं पटाने पर दोनों को डेढ़ साल की सजा और भुगतनी होगी। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
 
दो सदस्यीय जांच समिति ने पाई थी अनियमितता
 
छिंदगढ़ ब्लाॅक के धोबनपाल, गुर्रा, कुर्रेकुसुम, रतिनायक रास और कांजीपानी में 2005 में तत्कालीन जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर पीआर ठाकुर, विलास जाधव और एमके रुग्गी की देखरेख में सूखा राहत कार्य के तहत सड़क और तालाब निर्माण का कार्य किया गया था। इसके बाद तीनों सब-इंजीनियरों पर 14 लाख 41 हजार 689 रुपए की गड़बड़ी कर अतिरिक्त आहरण का आरोप लगा था।
 
शिकायत के बाद दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर केआर पिस्दा ने मामले की जांच के आदेश दिए। सहायक परियोजना अधिकारी देवेंद्र दुबे और पीडब्ल्यूडी के एसडीओ बालकृष्ण यादव की जांच में गबन की पुष्टि हुई। जांच टीम के प्रतिवेदन के आधार पर जनपद पंचायत के सीईओ बीआर भगत ने अप्रैल 2006 में सुकमा कोतवाली में एफआईआर की थी। जिसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। पुलिस चार सालों तक मामले की जांच करती रही।
 
लोकसेवकों के लिए सबक
 
अभियोजन अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि साक्ष्य पूरी तरह से आरोपियों के खिलाफ हैं। इससे समाज में विधि का शासन स्थापित होगा। उन्होंने न्यायालय के फैसले को सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार करने वाले लोक सेवकों के लिए सबक बताया।
 
सुकमा न्यायालय में हुई सुनवाई
 
चार सालों की पड़ताल के बाद पुलिस ने अप्रैल 2010 में मामले को कोर्ट में पेश किया। जनवरी 2013 से पहले मामले की सुनवाई दंतेवाड़ा कोर्ट में चलती रही। जनवरी 2013 के बाद से मामले की सुनवाई सुकमा न्यायालय में चल रही थी।
सुकमा. सुकमा कोर्ट ने गुरुवार को गबन और धोखाधड़ी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग (अारईएस) के दो इंजीनियरों को चार अलग-अलग धाराओं में 12 साल का कारावास और 50-50 लाख (कुल एक करोड़)जुर्माने की सजा सुनाई। सूखा राहत के लिए शासन से आवंटित राशि डकारने के आरोप में दस साल पहले तीन सब-इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक सब-इंजीनियर पीआर ठाकुर की मौत हो चुकी है।
 
सीजीएम प्रभाकर ग्वाल ने इंजीनियर विलास जाधव और एमके रुग्गी को 4 अलग-अलग धाराओं में 6-6 वर्ष की सजा और 50 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। रुग्गी भैरमगढ़ में एसडीओ हैं। इस मामले में 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। कोर्ट ने दोनों को धारा 409 के तहत छह वर्ष सजा व 15 लाख जुर्माना, धारा 420 के तहत 6 साल कैद और 10 लाख जुर्माना, धारा 467 के तहत 6 साल जेल और 15 लाख जुर्माना और धारा 468 के तहत 6 वर्ष कैद और 10 लाख जुर्माना लगाया है।
 
कोर्ट के मुताबिक धारा 409 और 420 की सजा एक साथ चलेगी। इसके भुगतने के बाद धारा 467 और 468 का सश्रम कारावास साथ चलेगा। यानी आरोपियों को कुल मिलाकर 12 साल जेल में रहना पड़ेगा। जुर्माना नहीं पटाने पर दोनों को डेढ़ साल की सजा और भुगतनी होगी। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
 
दो सदस्यीय जांच समिति ने पाई थी अनियमितता
 
छिंदगढ़ ब्लाॅक के धोबनपाल, गुर्रा, कुर्रेकुसुम, रतिनायक रास और कांजीपानी में 2005 में तत्कालीन जनपद पंचायत के सब-इंजीनियर पीआर ठाकुर, विलास जाधव और एमके रुग्गी की देखरेख में सूखा राहत कार्य के तहत सड़क और तालाब निर्माण का कार्य किया गया था। इसके बाद तीनों सब-इंजीनियरों पर 14 लाख 41 हजार 689 रुपए की गड़बड़ी कर अतिरिक्त आहरण का आरोप लगा था।
 
शिकायत के बाद दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर केआर पिस्दा ने मामले की जांच के आदेश दिए। सहायक परियोजना अधिकारी देवेंद्र दुबे और पीडब्ल्यूडी के एसडीओ बालकृष्ण यादव की जांच में गबन की पुष्टि हुई। जांच टीम के प्रतिवेदन के आधार पर जनपद पंचायत के सीईओ बीआर भगत ने अप्रैल 2006 में सुकमा कोतवाली में एफआईआर की थी। जिसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। पुलिस चार सालों तक मामले की जांच करती रही।
 
लोकसेवकों के लिए सबक
 
अभियोजन अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि साक्ष्य पूरी तरह से आरोपियों के खिलाफ हैं। इससे समाज में विधि का शासन स्थापित होगा। उन्होंने न्यायालय के फैसले को सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार करने वाले लोक सेवकों के लिए सबक बताया।
 
सुकमा न्यायालय में हुई सुनवाई
 
चार सालों की पड़ताल के बाद पुलिस ने अप्रैल 2010 में मामले को कोर्ट में पेश किया। जनवरी 2013 से पहले मामले की सुनवाई दंतेवाड़ा कोर्ट में चलती रही। जनवरी 2013 के बाद से मामले की सुनवाई सुकमा न्यायालय में चल रही थी।

 

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