
नई दिल्ली: सनातन धर्म में भगवान हनुमान को कलयुग का जागृत देवता माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से की गई उनकी आराधना भक्तों के जीवन से संकट, भय और बाधाओं को दूर करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन संध्या और रात्रि काल में उनकी उपासना को विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
संध्या और रात्रि में पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक संध्या काल वह समय होता है जब भगवान शिव सृष्टि का भ्रमण करते हैं। चूंकि हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, इसलिए इस समय उनकी पूजा-अर्चना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि मंगलवार और शनिवार की शाम को बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान दिनभर प्रभु श्रीराम की सेवा में लीन रहते हैं। इसलिए संध्या और रात्रि का समय उनकी आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
रात्रि में हनुमान चालीसा पाठ से मिलता है विशेष लाभ
धार्मिक विश्वास है कि रात के समय हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय, मानसिक तनाव और अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है। साथ ही साधक के भीतर आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि कई श्रद्धालु नियमित रूप से रात्रि में हनुमान जी का स्मरण और पाठ करते हैं।
हनुमान जी की पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
हनुमान जी की पूजा से पहले शरीर और मन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान लाल रंग के आसन पर बैठना शुभ माना गया है। साधक को अपने विचार, वाणी और व्यवहार में संयम बनाए रखना चाहिए तथा यथासंभव सात्विक जीवनशैली का पालन करना चाहिए।
पूजा स्थल पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान श्रीराम का पूजन करें और उसके बाद हनुमान जी की आराधना करें। घी का दीपक जलाकर पुष्प, फल और मिष्ठान अर्पित करें। इसके बाद हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
भक्ति और श्रद्धा ही है सबसे बड़ा उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा का वास्तविक फल विधि-विधान से अधिक श्रद्धा और विश्वास पर निर्भर करता है। हनुमान जी की आराधना यदि सच्चे मन, अनुशासन और समर्पण के साथ की जाए तो भक्तों को मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।



