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लोकसभा की सीटें 850 नहीं होने देंगे! थलपति विजय ने परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में पास कराया प्रस्ताव, 543 सीटों पर जोर

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने लोकसभा परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाने का विरोध करते हुए इन्हें स्थायी रूप से 543 पर ही बनाए रखने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्यों के हितों की कीमत पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि राज्य और अन्य दक्षिणी राज्यों ने राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। ऐसे में केवल आबादी के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण करने से इन राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है। सरकार ने केंद्र से परिसीमन के दौरान दक्षिणी राज्यों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

850 लोकसभा सीटें करने का विरोध

तमिलनाडु सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 किए जाने की संभावित योजना का विरोध किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इससे उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू किया है।

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से दक्षिणी राज्यों को परिसीमन के कारण होने वाले किसी भी नुकसान से बचाने की मांग की है। प्रस्ताव में इसे केंद्र की जिम्मेदारी बताया गया है।

महिला आरक्षण को लेकर भी विजय की मांग

मुख्यमंत्री विजय ने 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

विजय ने कहा कि तमिलनाडु में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की मतदान भागीदारी अधिक रही है। उनके मुताबिक महिलाओं को आरक्षण देना किसी तरह की रियायत नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का विषय है। उन्होंने 33 फीसदी महिला आरक्षण को बिना और देरी के लागू करने की मांग की।

केंद्र के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें

तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव में केंद्र के सामने चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली मांग लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 पर स्थायी रूप से बनाए रखने की है। दूसरी मांग राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के मौजूदा प्रतिनिधित्व अनुपात को फ्रीज करने की है।

इसके अलावा राज्यों और आबादी के बीच मौजूदा 2.2:1 अनुपात को बरकरार रखने की मांग की गई है। चौथी मांग 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की है।

परिसीमन को लेकर पहले भी हो चुका है विरोध

केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करना और 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करना था।

हालांकि, विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल सका और यह पारित नहीं हो पाया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने भी इसका विरोध किया है। विपक्ष की मांग है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए लागू किया जाए।

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