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पश्चिमी यूपी में मजबूत हो रहा है ISI का नेटवर्क, मिले सबूत

isi-56918ca57260a_exlstपाकिस्तानी जासूस इजाज की गिरफ्तारी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आईएसआई का नेटवर्क और मजबूत हो रहा है। व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाकर बरेली के छात्रों को जोड़कर उन्हें सूचनाएं संकलन करने के लिए इस्तेमाल करना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों ने एक नया तरीका खोज लिया है, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया है।

हाल ही में एक सुरक्षा एजेंसी को ऐसे चार संदिग्ध पाकिस्तानियों के नंबर मिले हैं, जो बरेली के छात्रों के लगातार मोबाइल फोन पर संपर्क में हैं। छात्रों के पास कुछ संदिग्धों की कॉल सऊदी अरब से भी आ रही है। आईजी ने इस मामले की छानबीन के लिए एटीएस को लगाया है।

खुफिया एजेंसियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अमरोहा और संभल आदि जिलों में आईएसआई की गतिविधियां होने का दावा करती हैं।

 

बरेली के दीवानखाना में रहकर मामूली सा फोटोग्राफर बनकर पाकिस्तान के लिए काम करने वाले इजाज ने मेरठ में पकड़े जाने के बाद सबको चौंका दिया।

संभल के युवक के आईएसआई से तार जुड़े होने पर गिरफ्तारी होने के बाद यह बात और पुख्ता हो गई है कि पश्चिमी यूपी में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के और भी गुर्गे हम लोगों के बीच छिपे हुए हैं। वह हम सबके बीच रहकर देश की जड़े खोदने का काम कर रहे हैं।

व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाकर छात्रों को जोड़ने वाले पाकिस्तानी का मकसद क्या है। इस पूरे मामले की जांच साइबर सेल और सर्विलांस सेल तो अपने स्तर से कर ही रही है। आईजी ने एसटीएस को भी पाकिस्तानी ग्रुप एडमिन के बारे में पता लगाने के लिए लगा दिया है।

उधर, एटीएस के सूत्रों के मुताबिक चार पाकिस्तानी नागरिकों के संदिग्ध नंबर मिले हैं। ये लोग बरेली के दो छात्रों के संपर्क में हैं। सऊदी अरब से कुछ संदिग्धों नंबरों से बरेली के कुछ लड़कों पर कॉल आ रही है। एसटीएस ने सभी संदिग्ध नंबरों को सर्विलांस पर लेकर काम करना शुरू कर दिया है।

 

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों से सावधान रहने की जरूरत है। वह भारतीय लड़कों की आईडी हैक करके उनकी पहचान चुरा लेते हैं। फेसबुक, मैसेंजर और हाइक जैसी तमाम सोशल साइटों से भी किसी को भी आसानी से नंबर मिल जाता है।

पाकिस्तानी व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाकर सोशल साइट पर मिले नंबरों को उससे जोड़ लेते हैं। इनमें से जो भी लड़का उनके काम का होता है, उसी का इस्तेमाल करने लगते हैं।

कुछ लड़कियों का भी लड़कों को फंसाकर सूचनाएं संकलन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लड़कियां प्यार भरी बातें करके शहर के बारे में पता करती हैं। उसके बाद एक-एक करके शहर की सभी चीजों के फोटो मंगाना शुरू कर देती हैं।

-संदिग्ध नंबरों से किसी के भी नंबर पर कॉल आ सकती है। व्हाट्स एप पर भी कोई किसी को ग्रुप में जोड़ सकता है। फेसबुक का भी यही हाल है कि कोई भी किसी अंजान को दोस्त बना लेता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। सोशल साइटों पर सावधानी से लोगों से दोस्ती करें। यह भी ध्यान रहे कि जिससे दोस्ती कर रहे हैं वह है कौन। व्हाट्स पर ग्रुप बनाकर बरेली के छात्रों को जोड़ने वाले का पता लगाने के लिए एटीएस को भी लगा दिया है- विजय सिंह मीना, आईजी

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