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भारत में चार लाख बच्चे इस सिंड्रोम से प्रभावित, जानिए अहम बातें

नई दिल्ली: ये एक जेनेटिक विकार है जो बच्चों में ऑटिज्म और बौद्धिक अशक्तता यानी एक सामान्य मानसिक रोग की वजह बनती है. ये जीन में बदलाव के कारण होनेवाली बच्चों में मानसिक खराबी है. जानकारों का कहना है कि इस विकार के बारे में जागरुकता बेहद कम है. स्वास्थ्य संबंधी सत्यापित सूचना खुद को और परिजनों को कई नई बीमारियों से सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत कवच हो सकता है. कोविड-19 महामारी के समय भारत में लोग कई नई बीमारियों और स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में जान रहे हैं. एक ऐसा ही दुर्लभ विकार फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम को विशेषकर सार्वजनिक जिंदगी में तत्काल ध्यान देने की जरूरत है जो बच्चों को अपनी चपेट में लेता है.

फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम या एफएक्सएस के बारे में लोग पहली बार सुन रहे हैं, ये एक दुर्लभ वंशानुगत स्थिति है जो बच्चों के सीखने, व्यवहार करने को प्रभावित करता है और जिससे बच्चों में ऑटिज्म, दौरे पड़ना, अटेंशन की कमी जैसी समस्याएं हो जाती हैं. कोरोना वायरस की भयावह दूसरी लहर के कारण देश में बहुत ज्यादा गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है, लेकिन कोविड-19 के मामलों में गिरावट के साथ कोठरी से कंकाल बरामद होते दिख रहे हैं. भारत में करीब चार लाख बच्चे फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम से प्रभावित हुए हैं. इस सिंड्रोम ने बहुत ज्यादा सुर्खियां महामारी से निपटने के कारण नहीं बटोरी है.

हाल ही में एक्टर बोमन ईरानी ने इंस्टाग्राम पर एक जागरुकता पोस्ट में विस्तार से फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम के बारे में बताया था और कहा था कि अभिभावकों को क्यों एफएक्सएस के बारे में अधिक जागरुक होना चाहिए. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सिर्फ भारत में करीब चार लाख बच्चे इस सिंड्रोम से पीड़ित हैं. उन्होंने अपने फैंस से इस मुद्दे पर बातचीत शुरू करने का आग्रह किया था.

ये सिंड्रोम किसी बच्चे की सीखने, व्यवहार, उपस्थिति और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. उसके लक्षण हल्के से अधिक गंभीर हो सकते हैं. लड़कियों की तुलना में लड़कों को ज्यादा गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है. इस जेनेटिक स्थिति के साथ जन्म लेनेवाले बच्चों का इलाज फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, विशेष शिक्षा और चिंता रोधी दवाइयों के इस्तेमाल से किया जा सकता है. दवाइयां और अन्य इलाज उनके व्यवहार और शारीरिक लक्षणों को सुधार सकते हैं. इस सिंड्रोम के बारे में सकारात्मक पहलू ये है कि वर्तमान में कई दवाओं का परीक्षण एफएक्सएस के लिए जारी है.

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