फीचर्डब्रेकिंगराष्ट्रीय

मूर्ति के सवाल पर मायावती ने SC से कहा- दलितों के लिए हमने शादी तक नहीं की

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी और हाथी की मूर्तियां बनाने के फैसले का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जवाब दायर किया है. मायावती ने कोर्ट के नोटिस का जवाब देते हुए मंगलवार को कहा कि इन मूर्तियों का निर्माण जनता की इच्छा के मुताबिक ही किया गया है. साथ ही उन्होंने इसके पीछे अपने समर्पण को भी एक वजह बताया और इसका उन्होंने बड़े भावुक अंदाज में जवाब दिया.

मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के जवाब में लिखा, ‘मैंने अपना सारा जीवन पिछड़े और दबे कुचले लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए अर्पित कर दिया है. अपने समर्पण की ही वजह से मैंने तय किया कि मैं विवाह नहीं करूंगी. जनता की उम्मीदें पूरी करने के लिए ही मैंने ये स्मारक बनवाए हैं.’

कांशीराम को मिले भारत रत्न

बसपा सुप्रीमो ने कोर्ट को दिए जवाब में अपने चार बार के शासन में वंचित वर्ग के लिए किए गए कामों का का ज़िक्र करते हुए बताया कि जब-जब मैं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही, मैंने पिछड़ों के लिए कई अहम योजनाएं चलाईं. उन्होंने कहा कि गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग की जनता ने कांशीराम से ये इच्छा जताई थी, जनता चाहती है कि कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न मिले. मायावती ने तमाम स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण की वजह जनता की इच्छा को बताया है.

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा कि उनकी और अन्य नेताओं की प्रतिमाएं और स्मारक बनाने के पीछे की मंशा जनता के बीच विभिन्न संतों, गुरुओं, समाज सुधारकों और नेताओं के मूल्यों एवं आदर्शों का प्रचार करना है ना कि बसपा के चिह्न का प्रचार या उनका खुद का महिमामंडन करना है. उन्होंने कहा कि स्मारकों के निर्माण और प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए निधि बजटीय आवंटन और राज्य विधानसभा की मंजूरी के जरिए स्वीकृत की गई है.

सरकारी फंड का दुरुपयोग?

मायावती ने प्रतिमाओं के निर्माण में सार्वजनिक कोष के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज करने की मांग करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और कानून का घोर उल्लंघन बताया है. सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को कहा था कि मायावती को उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर अपनी और पार्टी के चिह्न हाथी की मूतियां लगाने के लिए इस्तेमाल की गई सार्वजनिक कोष सरकारी राजकोष में जमा करानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में दायर एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें आरोप लगाया गया कि जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थी तब विभिन्न स्थानों पर उनकी और बसपा के चुनाव चिह्न की प्रतिमाएं लगाने के लिए 2008-09 और 2009-10 के लिए राज्य के बजट से करीब 2,000 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए गए हैं.

Related Articles

Back to top button