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सबूतों के अभाव में यूपी के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में 20 और आरोपी बरी

नई दिल्ली: अदालत ने वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में 20 और आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलापति ने मंगलवार को आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने में असफल रहा। अदालत ने जिन आरोपियों को आरोपमुक्त किया है उनमें कपिल, दुष्यंत, अजय, रविंदर, विकास, राहुल, सचिन, अमित, राजीव, जयपाल, अनुज, सुधीर, कुलदीप, मोहित, बारु और पांच अन्य शामिल हैं तथा सभी जिले के लंक गांव के रहने वाले हैं।

इन आरोपियों के खिलाफ आठ सितंबर 2013 को फुगना थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और आरोप था कि सभी 20 आरोपी पड़ोसी अब्दुल हसन के घर में दाखिल हुए और गला काटने के बाद हसन की गोली मारकर हत्या कर दी। यह प्राथमिकी पीड़ित के भाई की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। बरी किए गए आरोपियों पर घर से करीब छह लाख रुपये का सोना और गहने भी लूटने का आरोप था।

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों में करीब 60 लोगों की मौत हुई थी और जिले में बड़े पैमाने पर पलायन हुआ था। पुलिस ने इस सिलसिले में 510 प्राथमिकी दर्ज की थी और 1,480 लोगों पर दंगे में शामिल होने का आरोप लगाया था। उत्तर प्रदेश की विशेष जांच टीम ने अब तक 175 मामलों में जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया है। अदालत ने अब तक 99 मामलों में फैसला दिया है और 98 मामलों में सबूतों के अभाव में 1,198 लोगों को आरोप मुक्त किया है।

मुजफ्फरनगर दंगों के एक मात्र मामले में सजा हुई है। यह 27 अगस्त 2013 को दो व्यक्तियों गौरव और सचिन की हत्या से जुड़ा मामला था जिसमें सात लोगों- मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुर्कान, नदीम, जनानगीर, अफजल और इकबाल- को फरवरी 2019 में उम्र कैद की सजा सुनाई गई। माना जाता है कि इसी मामले से मुजफ्फरनगर में दंगे भड़के थे।

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