राष्ट्रीय

लक्षद्वीप में खत्म हुई 47 साल पुरानी शराबबंदी! केंद्र सरकार के बड़े फैसले से मचा सियासी और सामाजिक विवाद

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लक्षद्वीप को लेकर एक बड़ा और चर्चित फैसला लिया है। लगभग 47 वर्षों से लागू शराबबंदी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद द्वीपसमूह में नियंत्रित तरीके से शराब की बिक्री, आयात, निर्यात और अन्य गतिविधियों को अनुमति मिल जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और राजस्व में बढ़ोतरी होगी, जबकि स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया नियम

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लक्षद्वीप आबकारी विनियमन 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वर्ष 1979 से लागू शराबबंदी संबंधी प्रावधानों को वापस ले लिया गया है। सरकार का उद्देश्य लक्षद्वीप को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना बताया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि विदेशी और घरेलू पर्यटकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होटल, रिसॉर्ट और रेस्तरां में नियंत्रित रूप से शराब उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके जरिए पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलने के साथ-साथ सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।

अब नियंत्रित तरीके से होगी बिक्री

नई व्यवस्था के तहत शराब के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन और बिक्री को कानूनी ढांचा प्रदान किया गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया कड़े नियंत्रण और निगरानी में संचालित होगी।

प्रशासन इन सभी गतिविधियों पर नजर रखेगा और बिना अनुमति किसी भी प्रकार की बिक्री या वितरण की अनुमति नहीं होगी।

शराब पर लगेगा भारी आबकारी कर

नए नियमों के तहत देसी और विदेशी शराब पर 400 प्रतिशत तक आबकारी कर लगाया जाएगा। वहीं बीयर पर 200 प्रतिशत और वाइन पर 80 प्रतिशत कर वसूला जाएगा। इसके अलावा शराब बिक्री के लिए सरकारी और निजी संस्थाओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

नियमों के मुताबिक 21 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को शराब बेचना प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से नियंत्रण भी बना रहेगा और राजस्व भी प्राप्त होगा।

क्यों बढ़ा विवाद?

लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी लगभग 96.5 प्रतिशत बताई जाती है। वर्ष 1979 में शराबबंदी लागू करने के पीछे धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं को प्रमुख आधार माना गया था। ऐसे में शराबबंदी हटाने के फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर असहमति देखने को मिल रही है।

कई स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे द्वीपसमूह का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। उनका आरोप है कि आर्थिक लाभ और पर्यटन विकास के नाम पर सामाजिक मूल्यों से समझौता किया जा रहा है।

युवाओं पर असर को लेकर जताई जा रही चिंता

इस फैसले का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि शराब की उपलब्धता बढ़ने से युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका तर्क है कि इससे नशे की प्रवृत्ति बढ़ने और भविष्य में अपराध संबंधी चुनौतियां पैदा होने की आशंका है।

विरोध करने वाले नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले स्थानीय लोगों की भावनाओं और सामाजिक परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पर्यटन बनाम सामाजिक संतुलन की बहस तेज

शराबबंदी हटाने के फैसले के बाद लक्षद्वीप में पर्यटन विकास और सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर सरकार इसे आर्थिक विकास और पर्यटन विस्तार के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदाय का एक वर्ग इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए चुनौती मान रहा है।

Related Articles

Back to top button